लट्टूवा के नाच

लट्टूवा के नाच (बाल कविता)

लट्टूवा घुम-घुम घूमेला,

धरती पर रंग बनावे।

ना थकाला, ना रुक जाला,

सबके मनवा बहलावे।

 

पप्पू बोले— “अरे बाप रे!”

गोल-गोल जइसन चाँद।

गुड़िया हँस के बोले–

“ई त नाचेला दिन-रात।”

 

जब रुक जाए लट्टूवा तब,

सबके मन थोड़े उदास।

फेर धक्का दे दीं हौ छोटका,

फिर शुरू होई रंग-महास।

 

 

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Manoj Verma

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