शिक्षक बनना आसान नहीं
खुद को तरासना पड़ता है
नन्हें हीरे को तरासने के लिए…..
थके हुए बदन में भी
जान डालनी पड़ती है
इनके साथ चलने के लिए…..
हर दिन, हर पल
तरकीब नई लगानी पड़ती है
कुछ नया पाठ सीखाने के लिए…….
खुद को चंदन जैसा घिसकर
जीवन शिष्यों का महकाना पड़ता है
बगिया रिश्तों की खुशियों से भरने के लिए…..
बिखरे मोतियों को
एक माला में पिरोना पड़ता है
पाठ एकता का पढ़ाने के लिए……
सही गलत का फर्क समझाकर
राह सही दिखलानी पड़ती है
अच्छा व नेक इंसान बनाने के लिए…..
सच शिक्षक बनना आसान नहीं
बहुत कुछ करना पड़ता है
उन नन्हें मासूम बच्चों का
प्रेम, स्नेह, भरोसा पाने के लिए……!
मधु कुमारी
कटिहार

