पद्यपंकज Jiwan parichay श्री राधाकृष्णन

श्री राधाकृष्णन



1000329669.jpg

श्री राधाकृष्णन

 

सन् अट्ठारह सौ अट्ठासी पांच सितंबर दिवस था;

राधाकृष्णन जी का जब हुआ अवतरण था।

 

तमिलनाडु का तिरूतनी नामक एक ग्राम था;

जहां पे राधाकृष्णन जी का हुआ अवतरण था।

 

माता नाम सीताम्मा और पिता वीरास्वामी था;

जिनके यहां कृष्णन जी का हुआ अवतरण था।

 

ग्रामीण पाठशाला पढ़कर प्रवेश शहर में हुआ था;

दर्शनशास्त्र पढ़ करके हुआ अध्ययन पूरण था।

 

सिवाकाम साथ मिली और दांपत्य जीवन सुखमय था;

संग-संग घर-गृहस्थी में भी उत्तम संचरण था।

 

सब धर्मों का आदर करना उन्होंने सिखलाया था;

उनकी शिक्षाओं का हमें करना अनुसरण था।

 

शिक्षक बने राधाकृष्णन भाग्य छात्रों का जागा था;

शिक्षण विधियां इतनी प्यारी करना अनुकरण था।

 

कुलपति से राष्ट्रपति तक किया पद सुशोभित था;

सबके संग हिल-मिलकर दिखलाया सदाचरण था।

 

भारत-रत्न बने कृष्णन जी साल उन्नीस सौ चौवन था;

कार्यक्षेत्र में आया एक नया रूपांतरण था।

 

साल उन्नीस सौ पचहत्तर सत्रह अप्रैल दिवस था;

राधाकृष्णन जी का जब हुआ स्वर्गारोहण था।

 

कर्म-क्षेत्र और धर्म-क्षेत्र में इनका कार्य परम था;

मुश्किल कार्यों का भी इनसे हुआ निराकरण था।

 

5 सितंबर को हम सब शिक्षक दिवस मनाते हैं;

इनके पथ पर चलने की हम सब प्रेरणा पाते हैं।

 

ब्रजेश कुमार वर्मा

प्रधान शिक्षक, राजकीय प्राथमिक विद्यालय पानापुर गोसाई टोला, मीनापुर, मुजफ्फरपुर

0 Likes

BRAJESH KUMAR VERMA

Spread the love

Leave a Reply