श्री राधाकृष्णन
सन् अट्ठारह सौ अट्ठासी पांच सितंबर दिवस था;
राधाकृष्णन जी का जब हुआ अवतरण था।
तमिलनाडु का तिरूतनी नामक एक ग्राम था;
जहां पे राधाकृष्णन जी का हुआ अवतरण था।
माता नाम सीताम्मा और पिता वीरास्वामी था;
जिनके यहां कृष्णन जी का हुआ अवतरण था।
ग्रामीण पाठशाला पढ़कर प्रवेश शहर में हुआ था;
दर्शनशास्त्र पढ़ करके हुआ अध्ययन पूरण था।
सिवाकाम साथ मिली और दांपत्य जीवन सुखमय था;
संग-संग घर-गृहस्थी में भी उत्तम संचरण था।
सब धर्मों का आदर करना उन्होंने सिखलाया था;
उनकी शिक्षाओं का हमें करना अनुसरण था।
शिक्षक बने राधाकृष्णन भाग्य छात्रों का जागा था;
शिक्षण विधियां इतनी प्यारी करना अनुकरण था।
कुलपति से राष्ट्रपति तक किया पद सुशोभित था;
सबके संग हिल-मिलकर दिखलाया सदाचरण था।
भारत-रत्न बने कृष्णन जी साल उन्नीस सौ चौवन था;
कार्यक्षेत्र में आया एक नया रूपांतरण था।
साल उन्नीस सौ पचहत्तर सत्रह अप्रैल दिवस था;
राधाकृष्णन जी का जब हुआ स्वर्गारोहण था।
कर्म-क्षेत्र और धर्म-क्षेत्र में इनका कार्य परम था;
मुश्किल कार्यों का भी इनसे हुआ निराकरण था।
5 सितंबर को हम सब शिक्षक दिवस मनाते हैं;
इनके पथ पर चलने की हम सब प्रेरणा पाते हैं।
ब्रजेश कुमार वर्मा
प्रधान शिक्षक, राजकीय प्राथमिक विद्यालय पानापुर गोसाई टोला, मीनापुर, मुजफ्फरपुर
BRAJESH KUMAR VERMA


