जब भी लगे तुम्हें, विश्वास तुम्हारा डगमगाने लगा है, लेकर आशा की मशाल, दशरथ माँझी-सा आना तुम एक और प्रहार[...]
Day: March 26, 2025
चिपको आंदोलन- रामकिशोर पाठकचिपको आंदोलन- रामकिशोर पाठक
अंधाधुंध वन कटने लगे, चलने लगी कुल्हाड़ियाँ। होने लगा विनाश वनों का, थी शहर की तैयारियाँ। राजस्थान जहॉं पहले हीं,[...]
कविता की महिमा है न्यारी- अमरनाथ त्रिवेदीकविता की महिमा है न्यारी- अमरनाथ त्रिवेदी
कविता की महिमा है न्यारी, दिल को लगती बड़ी ही प्यारी। जो कोई इसमें खोना चाहे, मिलती खुशियाँ ढेरों सारी। कौन सी[...]
