हर उलझन कैसे सुलझेयह राह हमें दिखलाओ।आओ माँ मेरे जीवन सेकष्ट सारे तुम हर ले जाओ। तुम्हारे आने से आत्मबल[...]
Day: September 21, 2025
ऐ जिन्दगी तेरे लिए – डॉ पूनम कुमारीऐ जिन्दगी तेरे लिए – डॉ पूनम कुमारी
ए ज़िन्दगी तेरे लिए क्या क्या करना रह गया बाक़ी,बस इतना बता दे ज़िन्दगी बहुत भटक लिया गुमनामी मेंए जिंदगी[...]
शीतलता के बीच एक दोपहरी भटकी- रामपाल प्रसाद सिंह अनजानशीतलता के बीच एक दोपहरी भटकी- रामपाल प्रसाद सिंह अनजान
शीतलता के बीच एक दोपहरी भटकी।रोला कैसा है लावण्य, रूपसी नाजुक नारी।कोमल पीपल पात,सरीखे डिगती डारी।।जो जाते उस राह,भनक लेते[...]
है मान बाकी राम किशोर पाठकहै मान बाकी राम किशोर पाठक
है मान बाकी – शिखंडिनी छंद किसे हम कहें, बातें पुरानी। रहा कुछ नहीं, बाकी कहानी।। जिन्हें सुबह से, ढूँढा[...]
