: विज्ञान कविताआओ मिश्रण को अलग करे,ये पहल सब मित्रों से करें ।क्योंकि मिश्रण में छिपा है विज्ञान ,इसमें छिपा[...]
Day: October 9, 2025
चौसर – रुचिकाचौसर – रुचिका
चौसर जिंदगी के चौसर पर हम रहेंबस एक मोहरेंचाल ऊपर वाला चलता रहा।कभी शह, कभी मात वह देताऔर दर्प इंसानों[...]
धूप कहां देखती अपना घर- रामपाल प्रसाद सिंह अनजानधूप कहां देखती अपना घर- रामपाल प्रसाद सिंह अनजान
मदिरा सवैया211-211-211-211=211-211-211-2 धूप कहाॅं दिखती अपना घर। काॅंप रही किरणें अब ऑंगन,देख प्रभा यह पस्त हुई।गर्म हवा अब भाग रही[...]
दस्तूर दुनिया की- विधाता छंद मुक्तक- राम किशोर पाठकदस्तूर दुनिया की- विधाता छंद मुक्तक- राम किशोर पाठक
विधाता छंद मुक्तक जिसे रोना नहीं आया उसे कोई नहीं समझा।गमों के दौर से बोलो नहीं वह कौन जो उलझा।सदा[...]
Don’t want to be a Poet – Avdhesh kumarDon’t want to be a Poet – Avdhesh kumar
Don’t Want to Be a PoetI don’t want to be a poet now,I want to be a reader first .My[...]
उलझन – राम किशोर पाठकउलझन – राम किशोर पाठक
उलझन- गीत सारी सुविधा भरी पड़ी है, पर मिलता आराम नहीं।बहुत दिनों से घरवालों का, आया है पैगाम नही।। रोजी[...]
