दिवाली। -सादगी से दिवाली। आओ बच्चों चलो मनाने मिलकर हम सब दिवाली, आएँगी सज-धज कर घर में डोली पर बैठकर[...]
Day: October 17, 2025
दिवाली में -रामकिशोर पाठकदिवाली में -रामकिशोर पाठक
दिवाली में सजाकर गाँव की गलियाँ करें रौशन दिवाली में। सजा दो फूल की लड़ियाँ लगे उपवन दिवाली में।। बताना[...]
दीपक के कई रूप रत्ना प्रियादीपक के कई रूप रत्ना प्रिया
दीपक के कई रूप एक दीप, आशा की किरण, निराश मन की आशा | एक ज्योति, उज्ज्वल दृष्टि, नयनों की[...]
मीठी बोली- रामपाल प्रसाद सिंहमीठी बोली- रामपाल प्रसाद सिंह
मीठी बोली। कोयल के लिए स्वर,अनमोल सरोवर, डूबने को हर लोग,चाहते हैं दिन-रात। काक काला लिए रंग,कंठस्थ है स्वरभंग, करते[...]
वंदनवार सजे शारदा – रामपाल प्रसाद सिंहवंदनवार सजे शारदा – रामपाल प्रसाद सिंह
वंदनवार सजे शारदा शोर हुआ अब कानन में। मदिरा सवैया भोर हुई उठ जा प्रिय जीवन, बोल रही कोयल वन[...]
रामायण पढ़ते हैं – राम किशोर पाठकरामायण पढ़ते हैं – राम किशोर पाठक
गीतआओ चिंतन कर लें थोड़ा, जो खुद गढ़ते हैं।गाथा सुंदर रामायण की, हम-सब पढ़ते हैं।। आओ चिंतन कर लें थोड़ा,[...]
मेरी पोषण वाली थाली – अवधेश कुमारमेरी पोषण वाली थाली – अवधेश कुमार
मेरी पोषण वाली थाली : बाल कवितामाँ ने सजाये थाली में अनोखे रंग ,पोषण थाली अब करेगी कुपोषण से जंग[...]
कैसे कह दूं – बैकुंठ बिहारीकैसे कह दूं – बैकुंठ बिहारी
कैसे कह दूंकैसे कह दूं कि सब ठीक है,अजीब सी बेचैनी है।कैसे कह दूं कि सब ठीक है,अजीब सा अधूरापन[...]
