Day: November 30, 2025

वाह रे इंसान.. जैनेंद्र प्रसाद रविवाह रे इंसान.. जैनेंद्र प्रसाद रवि

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वाह रे इंसान *****************धन-दौलत सब माल-खजाना यहीं धरा रह जाएगा,खाली हाथ तू आया बंदे खाली हाथ ही जाएगा।मूर्ति की पूजा[...]

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Ram Kishore Pathak

तन्हा तन्हा..राम किशोर पाठकतन्हा तन्हा..राम किशोर पाठक

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कुण्डलिया तन्हा-तन्हा है आज-कल, यहाँ सकल संसार।कारण इसका क्या भला, करिए जरा विचार।।करिए जरा विचार, कभी खुद को भी झाँके।बना[...]

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Girindra Mohan Jha

संस्कार-गिरीन्द्र मोहन झासंस्कार-गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 10:17 am

कहता हूं, व्यक्ति अपने संस्कार का ही होता है गुलाम, सुसंस्कारवश अच्छा काम करता, कुसंस्कार से बुरा काम, अच्छा संस्कार[...]

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Ram Kishore Pathak

गौरव..रामकिशोर पाठकगौरव..रामकिशोर पाठक

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नाभा छंद २११-१११, २२२-२२ गौरव क्षणिक, पाना क्यों चाहें।कौन बरबस, फैलाता बाहें।।चाहत अगर, मैला हो तेरा।अंतस गरल, फैलाए डेरा।। सुंदर[...]

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