आह में देखो-राम किशोर पाठक

Ram Kishore Pathak

लोग हैं खास आह में देखो।

कौन है आज डाह में देखो।।

कह रहे हैं भला तुम्हें जो भी।

दे अगर साथ राह में देखो।।

फासले यहाँ दिलों में है।

गौर से गर निगाह में देखो।।

आज उम्मीद है सभी पाले।

टूटती आज चाह में देखो।।

मीत जो भी बना ठगा यारों।

दर्द को रूप स्याह में देखो।।

जो रहे दौड़ते रगो में हैं।

है खड़े वे गवाह में देखो।।

जिंदगी बेवफा बनी रहती।

गैर के ही पनाह में देखो।

रचयिता:- राम किशोर पाठक

प्रधान शिक्षक

प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला

बिहटा, पटना, बिहार

संपर्क – 9835232978

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