पद्यपंकज Bhakti,Teachers Of Bihar,ToB PadhyaPankaj महामंत्र: आत्म शुद्धि- धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

महामंत्र: आत्म शुद्धि- धर्मेंद्र कुमार ठाकुर


Dharmendra Kumar Thakur

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महामंत्र: आत्म शुद्धि
सिद्ध होंगे कार्य सारे, सिद्धियाँ चरण चूमेंगी,
सफलता की पताकाएँ, गगन में गोल घूमेंगी।
अगर पहचान ले तू स्वयं को, कल्याण पा जाए,
मिलेगी हर तड़प को तृप्ति, यदि आत्म शुद्धि हो जाए।
मछलियाँ मोह की छोड़ो, तृष्णा का जाल काटो तुम,
हृदय के इस मरुस्थल में, दया का नीर बाँटो तुम।
पलट दो रुख हवाओं का, बदल दो आज यह धारा,
जहाँ पर लोभ का पहरा, वहाँ हो त्याग का नारा।
मन को फेर दो ऐसा, कि लालच थर-थरा जाए,
पकड़ कर वासना का हाथ, संयम जीत के आए।
दिखे यदि स्वर्ण का पर्वत, तो मिट्टी मान कर तजना,
सदा ही सत्य की राहों पे, अपनी आत्मा सजना।
अशुद्ध मन से जो चाहोगे, वो केवल भ्रम ही लाएगा,
मगर पावन हृदय का संकल्प, सृष्टि को झुकाएगा।
करो अंतःकरण पावन, हटाओ स्वार्थ का कोहरा,
चमक उठेगा फिर जग में, तुम्हारी जीत का सेहरा।
पलट दो मन की सब चालें, जो लालच के विपरीत चलें,
जहाँ हर भावना निश्छल, वहीं पर शुद्ध दीप जलें।
यही है तंत्र, यही है मंत्र, यही है सत्य की सिद्धि,
सब काम पूरे होंगे तेरे, अगर हो जाए आत्म शुद्धि।
धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
प्राथमिक विद्यालय रेही टोला
रानीगंज अररिया
07.10.2026

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