अभी खेलने के दिन अपने-मनु कुमारी

Manu Raman Chetna

जी भरकर अभी खेल न पाई सखियों के संग मैया,
मेरे ब्याहन की खातिर क्यों बेच रही तू गैया।

अपने हक़ का लाड़-प्यार मुझको री मैया दे दो,
शादी की इतनी क्या जल्दी, यह मुझको मैया कह दो।

अभी खेलने के दिन अपने, अभी स्कूल है जाना,
पढ़-लिखकर इस दुनिया में मुझको नाम है कमाना।

किताबों से दोस्ती मेरी, सपनों से है नाता,
कल की मैं हूँ उजली किरण, मत तोड़ो मेरा भ्राता।

पंख नहीं मेरी काटो मैया, ऊँची उड़ान भरने दो,
बचपन को तो मैया मेरी, जी भरकर जीने दो।

कच्ची कली हूँ तेरे बाग़ की, मैया तरुणाई आने दो,
यह बचपन का नया सवेरा है, धूप अभी पाने दो।

कानून, संविधान भी बोले — बेटी बोझ नहीं है,
शिक्षा से ही सशक्त बने, यह कोई सोच नई है।

बाल-विवाह की बेड़ियाँ अब ,तोड़ो मैया आज,
बेटी नहीं अभिशाप कोई, बेटी है कुल की नाज।

कल मैं बनूँ शिक्षिका, डॉक्टर, या आईएएस अधिकारी,
तेरे ही नाम करूँगी मैया, अपनी हर तैयारी।

माता-पिता संतान के होते हैं ,सबसे हितकारी,
मत करना तू ब्याह अभी, सुन मेरी बात महतारी।

स्वरचित एवं मौलिक
मनु कुमारी,विशिष्ट शिक्षिका

प्राथमिक विद्यालय दीपनगर बिचारी,राघोपुर,सुपौल

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