वंदनीय होता है हर-पल, नारी का हर रूप-राम किशोर पाठक

Ram Kishore Pathak

वंदनीय होता है हर-पल, नारी का हर रूप।

उसके सारे रूप निराले, लगते बड़े अनूप।।

धीरज धरती सा रखती हैं, पर्वत सा विश्वास।

नदियों जैसी बहती हर-पल, लेकर सदा मिठास।।

दुर्गा, वाणी, लक्ष्मी, काली, सबकी ले दायित्व।

भाव हमेशा संग रखे जो, ममता है स्थायित्व।।

परिजन को छाया है देती, सहकर खुद ही धूप।

वंदनीय होता है हर-पल, नारी का हर रूप।।०१।।

जिसके आँचल में देवों ने, पाया है विश्राम।

जिसके पावन रज पड़ते ही, बंजर होता धाम।।

कार्य जगत् के जितने सारे, सबमें नारी हाथ।

पूर्ण तभी नर होते जग में, जब नारी का साथ।।

जिसके सन्मुख श्रद्धा रखकर, शीश नवाए भूप।

वंदनीय होता है हर-पल, नारी का हर रूप।।०२।।

नारी जगत् नियंता जानो, इनका लो आशीष।

नारी पूजन रक्षण से ही, शोभा है उष्णीष।।

नारी की आगे है रखते, हर-पल ही जगदीश।

इनकी मर्यादा से हर-पल, गर्वित रहता शीश।।

प्रेम भाव से इनसे रहिए, करिए कभी न कूप।

वंदनीय होता है हर-पल, नारी का हर रूप।।०३।।

गीतकार:- राम किशोर पाठक

प्रधान शिक्षक

प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला

बिहटा, पटना, बिहार।

संपर्क- 9835232978

0 Likes
Spread the love

Leave a Reply