*अलविदा_2025.*
वर्ष के इस अंतिम पड़ाव पर,
जब समय की पुरानी किताब का एक और अध्याय मुड़ रहा है,
मैं हृदय की गहराइयों से सबके समक्ष नतमस्तक हूँ।
जो शब्द अनजाने में काँटे-से चुभ गए,
जिन आँखों में अनिच्छा से आँसू भर आए,
जिन मनोभावों को अनजान में ठेस पहुँची,
जिन अपेक्षाओं को अनजाने में कुचल दिया,
जिन वादों को पूरा न कर सका,
जिन सपनों को आंशिक रूप से ही साकार कर सका—
उन सभी के लिए मेरी गहनतम क्षमायाचना।
मैंने शायद कई बार जल्दबाज़ी में निर्णय लिए,
कई बार मौन रहकर अन्याय को अनुमति दी,
कई बार अहंकार के आवरण में सत्य को छिपाया,
कई बार प्रेम के बदले उपेक्षा दी—
इन सभी मानवीय चूक, दुर्बलता और भूलों के लिए
न केवल क्षमा माँगता हूँ,
वरन् अपने भीतर के उस अँधेरे को भी स्वीकार करता हूँ
जिसने कभी-कभी प्रकाश को भी धुँधला कर दिया।
फिर भी इस यात्रा में आप सब रहे—
कभी हँसते हुए, कभी चुपचाप साथ निभाते हुए,
कभी डाँटते हुए, कभी समझाते हुए,
कभी बस दूर से प्रार्थना करते हुए—
आप सभी के लिए हृदय की गहराइयों से अनंत आभार।
आपके प्रेम ने मुझे संभाला,
आपकी आलोचना ने मुझे सुधारा,
आपकी सहनशीलता ने मुझे शर्मिंदा किया,
और आपकी उदार क्षमा ने मुझे पुनर्जन्म दिया।
आइए, इस संध्या को पुरानी कड़वाहट की अंतिम विदाई का क्षण बनाएँ।
पुरानी शिकायतों को आखिरी बार जलाकर राख करें,
और नए साल के साथ नए संकल्प,
नई करुणा, नया विश्वास और नया प्रेम लेकर चल पड़ें।
सभी को हृदय की गहराइयों से वर्षांत की शुभकामनाएँ
और एक ऐसे नववर्ष की प्रतीक्षा,
जो हमारे भीतर छिपे सर्वोत्तम को जागृत करे,
और जीवन को फिर से सुंदर, सार्थक व प्रेममय बनाए।
नतमस्तक और स्नेह से परिपूर्ण,
शैलेन्द्र…!🙏🏻🙏🏻🙏🏻
अलविदा 2025… शैलेन्द्र
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