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नव वर्ष -रामकिशोर पाठक


Ram Kishore Pathak

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नववर्ष – सार छंद गीत

शीत लहर से थर-थर कांँपे, हम-सब जरा विचारें।
आंग्ल वर्ष अब बदल गया है, सब नववर्ष पुकारें।।

जीव-जन्तु सब व्याकुल फिरते, खुशियाँ कैसी भाई।
रीत सभ्यता पश्चिम की यह, देते सभी बधाई।।
चलो ठीक है शुभद मनाएँ, पर चित में जरा निहारें।
आंग्ल वर्ष अब बदल गया है, सब नववर्ष पुकारें।।०१।।

नवल भाव से सबसे मिलना, होती अच्छी बातें।
बुरी सोच को विस्मृत कर दें, कट जाए दुख-रातें।।
पथ कुसुमित अब हमें बनाना, आओ भूल सुधारें।
आंग्ल वर्ष अब बदल गया है, सब नववर्ष पुकारें।।०२।।

सबकी खुशियों के खातिर ही, मौन अभी हो जाते।
मैं भी इतना चाहूँ पल-पल, रहें सभी मुस्काते।।
मिल जाए उत्कर्ष सभी को, जीवन सुखद गुजारें।
आंग्ल वर्ष अब बदल गया है, सब नववर्ष पुकारें।।०३।।

गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला, बिहटा, पटना, बिहार।
संपर्क – 9835232978

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