पद्यपंकज Prem,sandeshparak,Watsalya अनुपम है माँ की ममता-राम किशोर पाठक

अनुपम है माँ की ममता-राम किशोर पाठक


Ram Kishore Pathak

लेख सुनें तैयार

अनुपम है माँ की ममता।

अद्भुत रखती तन्मयता।।

अर्पित हर-पल रहती है।

बच्चों का दुख हरती है।।

चलना वह सिखलाती है।

सतपथ वह बतलाती है।।

सहकर सारी बाधाएँ।

सुख देती है माताएँ।।

कोई जब पीड़ा आए।

ईश्वर से भी लड़ जाए।।

कहती मुन्ना प्यारा है।

जीवन मुझपर वारा है।।

ईश्वर भी झुक जाते हैं।

जब धरती पर आते हैं ।।

राम बने या कृष्ण बने।

ममता के वे तृष्ण बने।।

मैं तो हूँ माँ की दुनिया।

लाड़ दिखाती है मुनिया।।

माँ का कहना मैं मानूँ।

और नहीं कुछ मैं जानूँ।।

रचनाकार:- राम किशोर पाठक

सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।

संपर्क- 9835232978

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