बाल कविता -आशीष अम्बर

बाल कविता

शीर्षक : अच्छे बच्चे- सच्चे बच्चे ।

अच्छे बच्चे सत्य बोलते ,
सच से सबकी आँख खोलते ।

अच्छे बच्चे मन के सच्चे,
करते नही शिकायत बच्चे ।

सुनते रहते कान हमेशा,
आँख देखती कैसा – कैसा ।

मगर नहीं ये चुगली खाते,
देखी – सुनी हजम कर जाते ।

इससे उसको नहीं लड़ाते,
नहीं बैठकर मजा उड़ाते ।

रखते कलम किताब ठीक से,
देते सभी जवाब ठीक से ।

लड़ते नहीं, झगड़ते नहीं ,
आदत बुरी पकड़ते नही ।

अच्छे बच्चे शाला जाते,
हँसते – हँसते , गाते – गाते ।

पाठ याद कर विद्यालय जाते,
मार न खाते, डाँट न खाते ।

बाहर से जो कोई आयें,
करें नमस्ते , उन्हें बिठायें ।

पढ़कर , लिखकर , खाना खाते,
नौ बजते – बजते सो जाते ।

खेलें तब, जब समय खेल का,
रखते वहाँ ध्यान मेल का ।

पर्यावरण बचाते हैं ये,
पर्यावरण बनाते हैं ये ।

छोटों पर रखते हैं ध्यान,
करें बुजुर्गों का सम्मान ।

खेलें, कूदें रोज शाम में,
हाथ बँटाते सभी काम में ।

रोज पढ़ेंगे छुट्टी होगी,
नही पढ़ेंगे, कुट्टी होगी ।

आशीष अम्बर
( विशिष्ट शिक्षक)
उत्क्रमित मध्य विद्यालय धनुषी
प्रखंड – केवटी
जिला – दरभंगा
बिहार

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