पद्यपंकज sandeshparak,Shakshanik अतुल है राष्ट्र की महिमा-एस.के.पूनम

अतुल है राष्ट्र की महिमा-एस.के.पूनम


S K punam

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जहाँ परिवेश है सुंदर,
वही महिमा बढ़ाते हैं।

पुराणों और वेदों से
विद्या की लौ जलाते हैं।

हमारा देश है प्यारा,
धरा पर मान पाते हैं।

अतुल है राष्ट्र की महिमा,
जहाँ तरु गीत गाते हैं।
(2)
विभूषित हों सदा साधू,
नदी तट पर बसेरा है।

रहे सोते प्रतीची में,
यही भारत सवेरा है।

धरा सींची अलकनंदा,
सदा मस्तक झुकाते हैं।

यहाँ के फूल फल सुंदर,
सदा खिरमन लुभाते हैं।
(3)
शिकन से दूर रहते हैं,
ठिकाना भी बदल जाए।

सजी गोधूलि वेला है,
निकेतन ने अमन पाए।

तुम्हारी राह जो रोके,
उसे ललकार कर आओ।

मिले आदेश योद्धा को,
सदा रण जीत सुख पाओ।

एस.के.पूनम
सेवानिवृत्त शिक्षक

फुलवारी शरीफ, पटना

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