मनहरण घनाक्षरी-जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

पक्षियों ने पंख खोला,उड़ने से डाल डोला, सुगंधित मंद-मंद , बहता पवन है। सरसों के फूल खिले, खेत दिखे पीले-पीले, चारों ओर हरियाली, खिलता चमन है। दिन देखो ढल गया,…

मनहरण घनाक्षरी:-“भोर”(खण्ड-1)- एस.के.पूनम

मनहरण घनाक्षरी:-“भोर”(खण्ड-1) भोर ने बुलाया जब,रवि दौड़ा आया तब, मिटा अंधकार सब,बुलाने में हित है। खाट छोड़ दिया तब,उजियारा हुआ जब, नयनों में ज्योत अब,सुबह की जीत है। पत्तियाँ चमकी…