पक्षियों ने पंख खोला,उड़ने से डाल डोला, सुगंधित मंद-मंद , बहता पवन है। सरसों के फूल खिले, खेत दिखे पीले-पीले, चारों ओर हरियाली, खिलता चमन है। दिन देखो ढल गया,…
Author: Anupama Priyadarshini
मनहरण घनाक्षरी:-“भोर”(खण्ड-1)- एस.के.पूनम
मनहरण घनाक्षरी:-“भोर”(खण्ड-1) भोर ने बुलाया जब,रवि दौड़ा आया तब, मिटा अंधकार सब,बुलाने में हित है। खाट छोड़ दिया तब,उजियारा हुआ जब, नयनों में ज्योत अब,सुबह की जीत है। पत्तियाँ चमकी…
जुड़ जाओ स्कूल से- अमरनाथ त्रिवेदी
बैठो न बेकार कभी भी, जुड़ जाओ स्कूल से । छोड़ स्कूल तू कुछ न पाओ , न जीवन को तू व्यर्थ गँवाओ । अनपढ़ होकर तुम शरमाओ , न…
यादें- जय कृष्णा पासवान
एक -एक सिसकियां- फिजाओं की खुशबू बांट रहे थे। पल-पल इन्तजार उस धड़ी का मानों आंखें मचल रहे थे। किया ख़्वाब सजाया था, खुदा मेरे हरेक लम्हों में पुरा हो…
बाल कुसुम- जैनेन्द्र प्रसाद रवि
बागों में कोयल बोले,कौआ बैठा डाल पर, मोर भी मोहित हुआ, मोरनी की चाल पर। मछली को मीन कहें, मगर मगर कौन ? बच्चे सारे हँस पड़े, गुरु के सवाल…
अरिल्ल छंद -सुधीर कुमार
अरिल्ल छंद मात्रा – १६ अंत – १२२ आपस में मत करो लढ़ाई । बच्चों कर लो खूब पढ़ाई ।। तुम अपना मत समय गँवाना । अच्छे बच्चे सदा कहाना…
प्रकृति का उपहार-जयकृष्णा पासवान
प्रकृति का उपहार एक बेल है सौंदर्य ,चंदन का मून । पेट लीवर सब ठीक करें, स्वास्थ्य वर्धक के गुण।। कन- कन बेल की वो मिठास, कई रोगो के नाशक…
भविष्य के प्रति आशा -अमरनाथ त्रिवेदी
भविष्य बनने से पहले , इतिहास न बनो तुम । कर्त्तव्य के आलोक को , विस्मृत न करो तुम । समझो न ऐसा कार्य कोई , जिसे तुम कर सकते…
अनुशासन- अमरनाथ त्रिवेदी
आत्म शासन ही अनुशासन , यह पल -पल हमे बताता है । सड़क हो या अन्य कोई जगह , मर्यादा में रहना हमे सिखाता है । हम क्या सोचें ;…
इंसान बना हैवान- अमरनाथ त्रिवेदी
इंसान बना हैवान , कि धरती डोल उठी । न रही मानवता की शान, कि धरती बोल उठी । जहाँ -जहाँ फूल खिलते थे , बो दिए हमने काँटे ।…