इन सर्दियों में ,गरीबों की रौनक रसहीन हो जाती है । सर्द थपेड़ों से जीना मुहाल हो जाती है ।[...]
Author: Anupama Priyadarshini
ताज़- जयकृष्णा पासवानताज़- जयकृष्णा पासवान
सुगम फरिश्तों के , ताज़ है आप । ममताऔर करुणा, की नाज़ है आप ।। “दिल इसे पाकर भला क्यों[...]
कर्त्तव्य- अमरनाथ त्रिवेदीकर्त्तव्य- अमरनाथ त्रिवेदी
देव -दृष्टि का स्वपुँज , कर में लिए क्यों फिरते हो ? संतप्त हो या अभिशप्त अभी , कुछ क्यों[...]
घरों म कचकचो- जयकृष्ण पासवानघरों म कचकचो- जयकृष्ण पासवान
कत्ह जतन स पाललकै पोसलकैय । पढ़ाय लिखाय करि जमीनों गमैलकैय ।। घर बसाय क बाबू करैय छौ किचकिचो ।[...]
उलझन -अमरनाथ त्रिवेदीउलझन -अमरनाथ त्रिवेदी
तन की पीड़ा भूल चुका पर , मन की पीड़ा भुला न पाया । सेवा अवसर आने पर भी ,[...]
लौहपुरुष -अमरनाथ त्रिवेदीलौहपुरुष -अमरनाथ त्रिवेदी
जिन्दगी के पुरुषार्थ को , यथार्थ से जाना उन्हें । उस मानवी काया को , सबने लौहपुरुष माना जिन्हें ।[...]
किसान-एस.के.पूनमकिसान-एस.के.पूनम
रश्मियां निकल आईं,पूरब में लोहित छाईं, कृषक तराने गाएं,अभी प्रातःकाल है। निकला विस्तर छोड़,देखा खेत-खलिहान, किसानों का मुखड़ा भी,देख खुशहाल[...]
जीवन का फ़लसफ़ा -जैनेन्द्र प्रसाद रवि’जीवन का फ़लसफ़ा -जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
सभी करते आनंद यहां अपने वजूद में, बड़े कामकाज करें, बच्चे खेलकूद में। किशोर तो विद्यालय जाएं करने पढ़ाई को,[...]
जीवन मूल्य- अमरनाथ त्रिवेदीजीवन मूल्य- अमरनाथ त्रिवेदी
संसार यदि बदलना हो तो , पहले हमें बदलना होगा । छल -प्रपंच सहित मनुज को , जीवन मूल्य बदलना[...]
प्रतीक्षा-जय कृष्णा पासवानप्रतीक्षा-जय कृष्णा पासवान
आंखों की रोशनी भी, जुगनू बन-कर देखता रहा । समंदर से मोती भी गोता लगाकर निकालता रहा ।। कोई फरियाद[...]
