दुनिया के हर सितम, मुझपे छलकती है । मगरूर है ज़माना देखो, क्या मजाक उड़ाती है।। “तपता है दिल मेरा” अरमान कुचल जाते हैं। रूखी- सूखी रोटी से, अपना दम…
Author: Anupama Priyadarshini
माँ की वेदना – अवनीश कुमार ‘अवि’
है कलयुग ,पाप चारो ओर छा रहा रावण ,कंस, दुःशासन पग पग डोरे डाल रहा धरती की रूह ,है काँप रही कैसे बची रहेगी धरती , धरती माँ भाँप रही…
जल संरक्षण – नवाब मंजूर
है जरूरी क्योंकि अनमोल है जीवन आपका मेरा सबका विशालकाय जीव और तुच्छ का! शरीर भी बना है इसका जीवन से है जो रिश्ता वनस्पतियां हैं बहुमूल्य संपदा जलपर ही…
मैं भारत ज्ञान प्रदाता हूँ- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
मैं भारत, ज्ञान प्रदाता हूँ। प्रज्ञा की ज्योति जलाता हूँ।। अपनी संस्कृति, सबसे सुंदर, यह जन-जन को बतलाता हूँ। मैं भारत ———————। माटी का कण-कण है प्यारा। इसका वैभव अद्भुत…
पीएम पोषण योजना- नवाब मंजूर
भोजन करते बच्चे लगते कितने अच्छे एक कतार में एक पंगत में अपने मित्रों के संगत में खा रहे हैं छोले और पुलाव प्रफुल्लित हैं, हर्षित हैं अण्डे की ओर…
नमन मंच – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
मनहरण घनाक्षरी “”””””””””””””””””””’” “डूबते को तिनके का” +++++++++++++ हजारों तारों के बीच, हमेशा चमकता है, जैसे आसमान बीच- एक ध्रुवतारा है। धीर-वीर पुरुषार्थी, दुनिया में पूजे जाते, अकेला सूरज करे-…
अवकाश चाहिए -संजय कुमार
थकान जो उतार दे, मन के अवसाद का मुझे वैसी अवकाश चाहिए। भागम भाग भरे जीवन में यन्त्र बने हम काम करे। खत्म नहीं होता यह फिर भी नहीं समय…
दोहावली -देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
काया वह किस काम की, अगर न हो उपयोग। श्रम की ज्वाला में तपा, करिए तब उपभोग।। बुरा कर्म होता बुरा, रहिए इससे दूर। अपनाकर सत्कर्म को, भरें तोष भरपूर।।…
बगावत नहीं होती -डॉक्टर मनीष कुमार शशि
भगवान की अदालत में वकालत नहीं होती, किसी के चिल्लाने से कयामत नहीं होती। जहाँ रहेंगे सच्चरित्र औ पक्के ईमानवाले, किसी के भड़काने से बगावत नहीं होती। इतना सीख चुका…
स्नेह -जयकृष्ण पासवान
हर रंग- रंग के अंग -अंग में, पावन रस भर जाता है। खुशियों की तू इत्र है मानो, रोम-रोम महक जाता है ।। दरिया के हर बूंद- बूंद में, प्रेम…