फल, फूल, सब्जी, खाइए भरपूर जी। चीनी, तेल, घी, खाने से पहले मुँह को लें सी। ज्यादा न खाओ चावल आलू, बन जाओगे मोटे भालू। खाने में लें ज्यादा सब्जी,…
Author: Anupama Priyadarshini
कौन रुका है? – गिरीन्द्र मोहन झा
कौन रुका है? प्रश्न है कौन रुका है? सूर्य, मंदाकिनी का चक्कर लगाते, अवनि, सूर्य का चक्कर लगाती, मयंक, पृथ्वी का चक्कर लगाता। फिर बोलो कौन रुका है? पौधे निरन्तर…
उठा वीणा बजा डालूँ – अमरनाथ त्रिवेदी
उठा वीणा बजा डालूँ , सुना मधुमास आया है । ये तारें हैं वीणा की , मधुर झंकार लाया है । खिले हैं फूल चहुँदिस में, बड़ा संदेश लाया है…
प्रकृति का संदेश – सुरेश कुमार गौरव
चलो चलें उस शांत वन में, जहाँ बसी है प्राण धुन में। पत्तों की बोली बह रही है, हरियाली के मृदु जतन में। नदी गुनगुन गीत कहती है, सागर छिपा…
ऑपरेशन सिंदूर -मनु कुमारी
(कविता) भारत माता ने दिया, सबको प्यार दुलार। लेकिन शत्रु ने किया, घात यहाँ हरबार।। जाति धर्म को पूछकर, किया पीठ पर वार। करेंगे उसका सर कलम, कर लेकर तलवार।।…
सीतासोहर – मनु कुमारी
सुन्दर सुभग मिथिला धाम से, पावन पवित्र भूमि रे। ललना रे जहां बसु राज विदेह, प्रजा प्रतिपालक रे। चकमक मिथिलाक मन्दिर, खहखह लागै गहबर रे। ललना रे सिया अइली धरती…
माँ – रूचिका
जीवन की कड़ी धूप में शीतलता का एहसास, माँ हर रिश्तों से है जुदा बेहद हीं खास, माँ जीवन की आपाधापी में एक नरम ठाँव, माँ से ही जुड़ी है…
सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय – नूतन कुमारी
उन्नति करें हम सब यों ही, सब संभव होगा, है विश्वास, अग्रणी होगा देश प्रतिपल, सबका साथ, सबका विकास। जन-जन का उद्धार हो, मिट जाए सबकी भूख-प्यास, ऐसी खुशहाली हो…
दहेज -डॉ. स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’
माँ के भला कोख़ में क्यों मरती बेटियाँ, जन्म लेती नमक क्यों हैं चखती बेटियाँ। समाज के दरिंदों तुम आवाज़ मेरी सुन, खुद मरती रहीं तुमको हैं क्यों जनती बेटियाँ।…
मानवता का हित करें – मनु कुमारी
(दोहा छंद) मानवता का हित करें, चलें नेम आचार। दीन दुखी से प्रेम हो, करिये पर उपकार।। क्रोध अगर कोई करे, पास न जाएं आप। मीठी वाणी बोलकर, हरिये फिर…