विश्व कार्यस्थल सुरक्षा एवं स्वास्थ्य दिवस – राम किशोर पाठक

मनहरण घनाक्षरी कार्यस्थल पर कहीं, दुर्घटना घटे नहीं, स्वास्थ्य सदा रहे सही, ध्यान यह धारिए। सभी जो है कर्मचारी, राष्ट्रहित शुभकारी, देखभाल रहे जारी, स्थल को निहारिए। स्वास्थ्य संरक्षण हित,…

शेष नहीं – शिल्पी

बहरहाल अर्ध हूँ मैं मेरे शून्य का कुछ प्रतिशत मृत्यु के द्वार पर है खड़ा शेष बाट जोह रहा इसके आमंत्रण की मेरे भीतर के पल्लवित ‘स्वंय’ ने आकांक्षा रखी…

मौन नहीं रहना (पहलगाम पर) – राम किशोर पाठक

मौन नहीं रहना– मतगयंद सवैया छंद पार करें दुःख की घड़ियाँ हम, मौन नहीं रहना अब सीखें। छोड़ दिए हम क्यों लड़ना अब, ओज भरें, फिर दुश्मन चीखें।। वार करे…

अफवाहों के दौर में – राम किशोर पाठक

छंद – कुण्डलिया अफवाहों के दौर में, रहिए ज़रा सतर्क। दिल से करके देखिए, मिलता क्या है तर्क।। मिलता क्या है तर्क, कभी पूछो अपनों से। जीवन का उत्सर्ग, रुके…

कलमकार का संदेश – राम किशोर पाठक

कलम हमारा आज है, लिखने को तैयार, चिंतन समाज का नहीं, लिखना तब बेकार। शब्दों को बस गूँथते, बनते रचनाकार, कथ्य-शिल्प को छोड़ते, लाते नव आचार। नहीं प्रेम-चिंतन धरे, बिना…

जीवन-दर्शन – गिरीन्द्र मोहन झा

तुम अपने जीवन के सुदीर्घ पथों को देख, मात्र निज जीवन-यात्रा पर फोकस करना। तेरा जीवन सहज, पवित्र, अर्थपूर्ण, परोपकारमय हो— यह जीवन-दर्शन है, ये बातें तुम सदैव ध्यान रखना।…

कोयल बोली मीठी बानी- सुरेश कुमार गौरव

कोयल बोली मीठी बानी, जैसे बजे मधुर तान, डाली-डाली झूम उठी है, हरियाली मुस्कान। नीम की डाली पर बैठी, गाए प्यारा गीत, सुनते ही मन हर्षित होता, हर बच्चा हो…

शिवरात्रि है – राम किशोर पाठक

छंद – घनाक्षरी शिव शंकर की भक्ति, श्रद्धा भाव यथाशक्ति, मिटाती यह आसक्ति, बनें दया-पात्र हैं। मनाएँ हर माह में, त्रिपुरारी की छाँह में, कृपालु के पनाह में, रहें दिवा-रात्र…