विषय -हिन्दी पत्रकारिता दिवस। सुबह सबेरे दरवाजे पर आता है अखबार, इस अखबार में संवाद देने वाले का नाम पत्रकार पत्रकार पत्रकार पत्रकार। अगर कहीं कुछ होता है तो जल्दी…
Author: Anupama Priyadarshini
मनहरण घनाक्षरी- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
प्रातः हम जग जाएँ, शीतल समीर पाएँ, प्राची की लालिमा देख, कदम बढ़ाइए। हरे-भरे तरु प्यारे, लगते सलोने न्यारे, इनके लालित्य पर, मन सरसाइए। नदी का पावन जल, बागों के…
मैं पत्रकार हूं – मनु कुमारी
मैं पत्रकार हूं ! मैं जनतंत्र की आवाज, लोकतंत्र का साज हूं, मैं पत्रकार हूं। कलम हमारी ताकत है,कलम हमारी जान है। कलम से हीं विश्व भर में बनी मेरी…
मजदूर दिवस – डॉ मनीष कुमार शशि
मैं हूं एक मजदूर , समस्याएं भरपूर , लड़ता हूं रोज पर , हार नहीं मानता। खुद रहे फटेहाल, रखें सब को खुशहाल, मालिक का कभी , कहा नहीं टालता।…
दोहावली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
श्रमिक दिवस पर हम सभी, करें श्रमिक-सम्मान। श्रम की निष्ठा में निहित, नवल शक्ति पहचान।। श्रम को जीवन धारिए, करिए मत आराम। यही श्रमिक की साधना, यही फलित आयाम।। सत्कर्मों…
विधा: कुंडलिया – देव कांत मिश्र ‘दिव्य
आओ मिलकर हम सभी, करें श्रमिक सम्मान। श्रम की निष्ठा में निहित, नवल शक्ति पहचान।। नवल शक्ति पहचान, दिव्य आँखों से करिए। श्रम है बड़ा महान, इसे निज मन में…
बचपन- Ayushi
मुझे समझ नहीं आती सबकी बातें बस अपनी मर्ज़ी का करता हूं लाख मुझे कोई क्यूं ना समझाए मगर ज़िद पर अपनी अडिग रहता हूं सब कहते ये मत कर…
बेचारा मजदूर- नीतू रानी
बेचारा मजदूर दिनभर करता मजदूरी परिवार से रहता दूर, बेचारा मजदूर। कभी खेत में काम है करता कभी सड़कों पर धूप को सहता, जाड़ा गर्मी और बरसात को सहता है…
बचपन की शरारतें – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
जब कोई फल भाता, दूर से नज़र आता, छिप कर बागानों से, टिकोले को तोड़ता। गाँव की हीं महिलाएँ, कुएँ पर पानी भरें, पीछे से कंकड़ मार, मटके को फोड़ता।…
मेरे प्रश्नों के उत्तर- अवनीश कुमार
अम्मा तुम तो कहती है चाँद पर एक बुढ़िया जो है चरखा चलाती पर मुझे अम्मा क्यों ऐसा लगता चाँद पर बैठी बुढ़िया है ढोलक बजाती अम्मा तुम तो कहती …