Author: Anupama Priyadarshini

Om prakash

प्रकाश का परावर्तन – ओम प्रकाशप्रकाश का परावर्तन – ओम प्रकाश

0 Comments 8:25 pm

किरणें जो सतह से टकराए कहलाती हैं आपतित, टकरा कर लौटती किरणें कहलाती हैं परावर्तित.. हो सतह यदि चिकनी-समतल तो[...]

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Sanjay Kumar

बंधन प्रीत के – संजय कुमारबंधन प्रीत के – संजय कुमार

0 Comments 9:39 pm

आपसे ही बंधी,मेरे जीवन की हर डोर आपसे ही पिया सांझ है,आपसे ही भोर। आप ही मेरे,मनमंदिर के अप्रतिम देव,[...]

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S K punam

ईश्वर की लीला जान – एस.के.पूनमईश्वर की लीला जान – एस.के.पूनम

0 Comments 9:37 pm

खींची रेखा किस्मत की, बर्षों की थी इंतजार, कोसों दूर आन मिली,ईश्वर की लीला जान। माँग है सिंदूरी लाल, बिंदिया[...]

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Devkant

प्रेरणा गीत: सीखो – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’प्रेरणा गीत: सीखो – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 9:35 pm

प्रतिदिन अपनी माँ से सीखो करुणा को बरसाना। प्रेम-भाव से सिक्त हृदय में सौम्य सुमन महकाना।। अनुशासन चींटी बतलाती गुण[...]

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देव गजानन – मीरा सिंह “मीरा”देव गजानन – मीरा सिंह “मीरा”

0 Comments 9:33 pm

आओ घर में देव गजानन करके वाहन मूस सवारी। तेरे दर्शन को आतुर है इस दुनिया में सब नर नारी।।[...]

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Jainendra

हरितालिका तीज – जैनेन्द्र प्रसाद रविहरितालिका तीज – जैनेन्द्र प्रसाद रवि

0 Comments 9:32 pm

सुहागिन महिलाएं अपने पति के लिए, दीर्घायु जीवन हेतु, रखतीं हैं उपवास। मन-कर्म वचन से करती हैं उपासना, माँगती दुआएँ[...]

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Jainendra

गणेश चतुर्थी – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’गणेश चतुर्थी – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 9:30 pm

बिगड़ी बनाने हेतु सभी तेरे द्वार आते, श्रद्धा पूर्वक भक्तों के, वंदना में झुके माथ। नारियल फल-फूल मोदक चंदन लिए,[...]

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S K punam

वंदना में झुके माथ – एस.के.पूनमवंदना में झुके माथ – एस.के.पूनम

0 Comments 9:28 pm

पार्वती के प्रिय पुत्र, एकदंत गणपति, आगवन घर-घर,लाए हैं आनंद साथ। मंदिरों के पट खुले, फूल माला खूब चढ़े, कुंज-कुंज[...]

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Ranjeet Kushwaha

ओज़ोन दिवस – रणजीत कुशवाहाओज़ोन दिवस – रणजीत कुशवाहा

0 Comments 11:24 pm

आज दिवस है बहुत विशेष। ओज़ोन दिवस पर यह संदेश।। ज्यों बढ़ता कार्बन उत्सर्जन। घटे परत ओज़ोन दिनों -दिन।। वसुंधरा[...]

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Jainendra

अभिलाषा – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’अभिलाषा – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 11:22 pm

महीनों के बाद मिला ये फल मेहनत का, हरा-भरा खेत देख, हँसता किसान है। बाँध और क्यारियों में लबालब पानी[...]

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