जाने क्यों लोग बेटी को बोझ समझते हैं। बेटी कोई अभिशाप नहीं यह तो आंगन की लक्ष्मी है।। किसी के घर खुशहाली बनकर तो किसी के घर लक्ष्मी बनकर आती…
Author: Anupama Priyadarshini
तेरा पिता हूँ मैं
तेरा पिता हूँ मैं तेरी गहरी से गहरी विपत्तियों की थाह हूँ मैं ज़िन्दगी की भाग-दौड़ में कठिनाईयों के किसी मोड़ में जब तुम निराशापूर्ण धुप से कुम्हला जाओ तो…
बाल गीत (सुंदर धूप में)
गीतिका छंद सृष्टि सुंदर धूप में। बाल भोलेनाथ ऐसे, रूप दिखला दें कहीं। धन्य प्राणी मान ले वो,कामना अरु कुछ नहीं।। वेशभूषा से लगा है,नाथ बालक रूप में। क्या गजब…
पहचान बचा कर रख लेना
खोते जीवन की कुछ तो पहचान बचा कर रख लेना । प्रेम दया अपनत्व और ईमान बचाकर रख लेना।। आने वाली पीढ़ी जब पूछेगी दुनिया कैसी थी। बतलाने को घर…
मन की जहर को अमृत बनाना
कविता:- मन की जहर को अमृत बनाना ************************* मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर करना l मेरे कोमल मन में कोई जहर न तुम भरना l मानव धर्म ही श्रेष्ठ…
विश्वास का ह्रास
विश्वास का ह्रास मन हमारा रोया था, जब तुम्हारे आंशु में, जब हम दोनों श्वास लिए थे एक-दूसरे के श्वासो में , वादा ऐसे जैसे रघुकुल का रीत हो, प्यार…
जीवन की बगिया
।।जीवन की बगिया।। जीवन की बगिया में देखो फूल भी है और कांटे भी खड़ी धूप और अंगारे भी चलते जीवन की राहों में जीवन के रंग निराले भी …
Jago pyare
जागो प्यारे जागो प्यारे हुआ सवेरा, मैं देखूं हंसता मुख तेरा। होठ हिला कर कमल खिलाओ, रुनुक झुनुक पैजनी बजाओ। मुझे लुभाओ तुम गा-गा कर, मीठे-मीठे बोल सुना कर। सबके…
चेतावनी
चेतावनी अहंकार लिए तु किसे ढूंढता है मुरख, धन वासना और सुख सागर के बन्धनों में, आनन्द तुम्हारे अन्दर ही उबाल मार रहे होंगे परमानन्द मिलेंगे तुम्हारे ही हर व्यवहारों…
बाल गीत
प्रहरणकलिका छंद 1111112 1111112 सचमुच शिवरूप मगन दिखते। गतिविधि करते खिल-खिल खिलत।। तिलक चमक चंदन सम तिरते। सर पर कच काजल कर फिरते।। तन पर बघ-छाल नयन भरते।…