Author: Anupama Priyadarshini

Jainendra

जैसी होती भावना- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’जैसी होती भावना- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

0 Comments 10:17 am

जैसी होती भावना मनहरण घनाक्षरी छंद मानने से पत्थर में- मिलते हैं भगवान, दूध में मक्खन सिर्फ, देखे मेरी भावना।[...]

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Jainendra

अँखियाँ भिगोने से- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’अँखियाँ भिगोने से- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

0 Comments 8:52 am

मनहरण घनाक्षरी छंद कड़ी धूप खिलने से- परेशानी बढ़ जाती, मौसम बदल जाता, बरसात होने से। मजदूर किसानों की- मेहनत[...]

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स्कूल कितना जरूरी है!स्कूल कितना जरूरी है!

0 Comments 9:56 pm

शीर्षक – स्कूल कितना जरूरी है!   यह स्वतंत्र हंसी ये आंखों की चमक बता रही है कि.. लड़कियों के[...]

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शिक्षक कहलाए- मधु कुमारीशिक्षक कहलाए- मधु कुमारी

0 Comments 8:09 am

शिक्षक कहलाए….. बातें ज्ञान की जो सिखलाए देखो बच्चों वो शिक्षक कहलाए…… प्रथम गुरु है माता महान सदा करो इनका[...]

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