Author: Anupama Priyadarshini

Jainendra

अँखियाँ भिगोने से- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’अँखियाँ भिगोने से- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

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मनहरण घनाक्षरी छंद कड़ी धूप खिलने से- परेशानी बढ़ जाती, मौसम बदल जाता, बरसात होने से। मजदूर किसानों की- मेहनत[...]

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स्कूल कितना जरूरी है!स्कूल कितना जरूरी है!

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शीर्षक – स्कूल कितना जरूरी है!   यह स्वतंत्र हंसी ये आंखों की चमक बता रही है कि.. लड़कियों के[...]

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शिक्षक कहलाए- मधु कुमारीशिक्षक कहलाए- मधु कुमारी

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शिक्षक कहलाए….. बातें ज्ञान की जो सिखलाए देखो बच्चों वो शिक्षक कहलाए…… प्रथम गुरु है माता महान सदा करो इनका[...]

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जादूगर ध्यानचंदजादूगर ध्यानचंद

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रूप घनाक्षरी जादूगर ध्यानचंद संगम प्रयाग भाग्य ,खुल गया तब जब, उनतीस अगस्त को, जन्म लिया नवजात। भारत माता की[...]

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