मैं आई हूँ दिल्ली नगर , यहाँ चल रहा शीतलहर। हवा बहुत है चल रही, ठंड बहुत है बढ़ रही। नल से गिरता ठंडा पानी, छूते याद आती है नानी।…
Author: madhukumari
चित्रा छंद – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
शुभ भोर देख कर खग जागे। डाली तरुवर पर से भागे।। विश्वास ध्यान अब है भू पर। खाद्यान्न प्राण भरते छूकर।। जब भूख विवश करता तन को। करते सहमत अपने…
जड़मति-राम किशोर पाठक
समझ न पाता, मन घबराता। जड़मति हूॅं मैं, कुछ कर माता।। अगर कृपा माँ, कर कुछ दोगी। हर दुविधा को, अब हर लोगी।। शरण तुम्हारी, सब सुख दाता। जड़मति हूॅं…
चल रही – राम किशोर पाठक
लड़खड़ाती जिंदगी यह, आज भी है चल रहीं। सामने है काल तो क्या, काल को भी खल रही।। हौसलों को देख मेरे, दंग रह जाते सभी। सोचते हैं बस हमेशा,…
रजाई- राम किशोर पाठक
लिपट-लिपट मैं जिसके रहती। शीत लहर को हँसकर सहती।। संग मुझे लगता सुखदाई। क्या सखि? साजन! न सखि! रजाई।।०१।। रंग विरंगा रूप सलोना। भूलूँ संग शीत का रोना।। संग में…
खुद ही राह बनाओ – अमरनाथ त्रिवेदी
जमाना सुनता सबकी बातें , सोच समझ करता निज मन की । बनेगी पहचान तो तभी उसे ही , निकलेगी बात ज़ब उसके दिल की । कदम – कदम पर मिलती नसीहत मिलते साथ देनेवाले मुश्किल से । इतनी भलमनसाहत – उतनी शराफत , न रहता सभी के सच्चे दिल से ।…
हिल-मिल जाइए-राम किशोर पाठक
आज हुआ है तमस घनेरा, दीप जलाइए। फैलाकर उजियारा जग का, मित्र कहाइए।। स्वार्थ भावना को तजने से, खोते कुछ नहीं। करना क्योंकर तेरा मेरा, हिल-मिल जाइए।। दुनिया की दस्तूर…
आजमाने के लिए-राम किशोर पाठक
वक्त लोगों को बहुत है आजमाने के लिए। दाव सारे जानते हैं जो गिराने के लिए।। वक्त ने ऐसा सितम भी आज ढाया है यहाँ। दूर अपने हो गए दौलत…
धन्यवाद टीचर्स ऑफ बिहार – एम० एस० हुसैन “कैमूरी”
है कोटि-कोटि धन्यवाद ऐ टीचर्स ऑफ बिहार तेरे बदौलत हीं सबका होता है सपना साकार रचनाएं दब सी जाती थी होता न था प्रचार प्रसार लिखना शुरू मैंने किया तुने…
सर्द हवा-राम किशोर पाठक
सर्द हवाओं का झोंका है। अम्मा ने मुझको रोका है।। कहती बाहर में खतरा है। सर्दी का पग-पग पहरा है।। देखो छाया घना कोहरा। सूरज का छिप गया चेहरा।। बूँद…