रजाई- राम किशोर पाठक 

लिपट-लिपट मैं जिसके रहती। शीत लहर को हँसकर सहती।। संग मुझे लगता सुखदाई। क्या सखि? साजन! न सखि! रजाई।।०१।। रंग विरंगा रूप सलोना। भूलूँ संग शीत का रोना।। संग में…

खुद ही राह बनाओ – अमरनाथ त्रिवेदी

जमाना    सुनता      सबकी   बातें , सोच  समझ   करता  निज    मन  की । बनेगी   पहचान  तो   तभी   उसे   ही  ,   निकलेगी बात  ज़ब  उसके  दिल  की । कदम – कदम   पर     मिलती    नसीहत   मिलते  साथ   देनेवाले     मुश्किल  से ।   इतनी  भलमनसाहत – उतनी    शराफत ,   न  रहता      सभी   के  सच्चे   दिल   से ।…

हिल-मिल जाइए-राम किशोर पाठक 

आज हुआ है तमस घनेरा, दीप जलाइए। फैलाकर उजियारा जग का, मित्र कहाइए।। स्वार्थ भावना को तजने से, खोते कुछ नहीं। करना क्योंकर तेरा मेरा, हिल-मिल जाइए।। दुनिया की दस्तूर…

धन्यवाद टीचर्स ऑफ बिहार – एम० एस० हुसैन “कैमूरी”

है कोटि-कोटि धन्यवाद  ऐ टीचर्स ऑफ बिहार  तेरे बदौलत हीं सबका होता है सपना साकार  रचनाएं दब सी जाती थी होता न था प्रचार प्रसार  लिखना शुरू मैंने किया  तुने…

सर्द हवा-राम किशोर पाठक 

सर्द हवाओं का झोंका है। अम्मा ने मुझको रोका है।। कहती बाहर में खतरा है। सर्दी का पग-पग पहरा है।। देखो छाया घना कोहरा। सूरज का छिप गया चेहरा।। बूँद…

जुआ-रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ 

छल सुयोधन संग लेकर,चल पड़ा दरबार में। माॅंगना है जो नियोजित,शेष अगली बार में।। पास राजा के पहुॅंचकर,चाल वैसी ही चली। दाव का विश्वास पाकर,ढाल संगत ही ढली।। हर्ष का…