भक्त हितकारी-जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

विश्वनाथ मम नाथ मुरारी। त्रिभुवन महिमा विदित तुम्हारी।। कौशल्या नंदन बन रघुकुल आये, नीर निधि के बीच द्वारिका बसाये, कोई कहे रघुवर कोई गिरधारी। त्रिभुवन महिमा विदित तुम्हारी।। इन्द्र को…

बसंत ऋतु आया-मुन्नी कुमारी 

देखो बसंत ऋतु है आया,  कितना सुंदर खुशियां लाया।  मोर, पपीहा, कोयल गाए,  सुंदर-सुंदर पक्षी छाए।  देखो बसंत ऋतु है आया, कितना सुंदर खुशियां लाया। सुबह-सुबह जब सुरज निकले,  मन…

मैं हूं शिक्षक-डॉ स्नेहलता द्विवेदी आर्या

मैं इस धरा के ज्ञान धर्म का वाहक हूँ, जननी के स्वाभिमान मर्म का नायक हूँ। मैं शिक्षक संस्कार, सत्य तप का राही, वसुधा से अज्ञान मिटाने वाला हूँ। इस…

तुम हो तो बसंत है-मनु कुमारी

तुम हो तो बसंत है, वरना मौसम रूठ जाते हैं, तुम्हारी हँसी से पतझर भी गीत गुनगुनाते हैं। तुम्हारा साथ मिले तो राहें मुस्कुराती हैं, अधूरी-सी ज़िंदगी भी पूरी हो…