गिनती – स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’

गिनती गिनती किसको आती है? भूल गुड़िया क्यों जाती है? आओ गिनती गिनना सीखें, मन को क्यों भरमाती है? रोहित आजा पास हमारे, खड़े तू रहना अभी किनारे। रोहित खड़ा…

बच्चों में संख्या ज्ञान – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’

बच्चों में संख्या ज्ञान धरती में जो बीज पड़ा है। पावस पाकर भीज खड़ा है।। कर्ता बन उसको सहलाए। तभी हरापन बाहर आए।। समझें कोरा मत बालक को। समझें ज्ञानवान…

संख्या का ज्ञान करें प्रदान – राम किशोर पाठक

संख्या का ज्ञान करें प्रदान- बच्चे कोरे कागज जैसे। संख्या ज्ञान कराएँ कैसे।। अंक शून्य से नौ तक रहता। संख्याओं का मेला लगता।। बच्चे इनको समझ न पाते। जबतक अमूर्त…

माहवारी औरतों के लिए ईश्वरीय वरदान – नीतू रानी

माहवारी औरतों के लिए ईश्वरीय वरदान। माहवारी ईश्वर ने दिया औरतों को यह वरदान। जिससे हर घर में खेल रहा है सुंदर प्यारा शिशु संतान।। जो महिला को ईश्वर ने…

मैं हूॅं माहवारी – मनु कुमारी

मैं हूँ माहवारी! मैं हूँ ईश्वर का वरदान । मैं बढ़ाती हूँ नारी का मान।। संतान सुख का मैं राह बनाती। माँ बनने का सौभाग्य दिलाती।। मैं न हूॅं अभिशाप…

पकड़े उन्हें न बीमारी – लावणी छंद गीत – राम किशोर पाठक

पकड़े उन्हें न बीमारी – लावणी छंद गीत आओं समझे हम नारी को, जिनकी महिमा है भारी। सृजन हमारा जिनसे होता, पकड़े उन्हें न बीमारी।। इनकी जैविक संरचना है, अलग-अलग…

बचपन में जो नहीं पिटाया- रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’

बचपन में जो नहीं पिटाया बचपन में जो नहीं पिटाया, उसका है इतिहास नहीं। निज घर में पिंजरबद्ध हुआ,उसका है इतिहास कहीं।। बचपन के पनघट पर जाकर,घोंघे मोती पातें हैं।…

माँ की सीख- स्रग्विणी छंद – राम किशोर पाठक

स्रग्विणी छंद आधारित माँ की सीख- बाल सुलभ रोज माँ टोकती है सुधारो इसे। दोष तूने किया है निहारो इसे।। भूल कोई उसे है सुहाता नहीं। रोज मैं भी उसे…

संस्कारों का संगम- सुरेश कुमार ‘गौरव’

“संस्कारों का संगम” संयुक्त कुल की छाया में, बचपन बुनता स्वप्न सुनहरे। दादी की गाथा, दादा की सीख, संस्कार बिखरें प्रेम मनहरे। चाचा की डाँट, चाची का स्नेह, सब मिलकर…