कचरे की ढेर समसामयिक रचना सबको दे खुशहाली, चली गई ये दिवाली, बाजारों में जमा हुई, कचरे की ढेर है। जश्न पुरज़ोर होता, पटाखे की शोर होता, जागने से आंखें…
Author: Dr Snehlata Dwivedi
भुला नहीं हूं -बैकुंठ बिहारी
भूला नहीं हूं बाल्यावस्था की शरारत भूला नहीं हूं, माता-पिता की आंखों में प्रसन्नता के अश्रु भूला नहीं हूं, किशोरावस्था का उतार-चढ़ाव भूला नहीं हूं, काम, क्रोध, मद लोभ, मोह…
गोवर्धन- राम किशोर पाठक
गोवर्धन- पादाकुलक छंद आधारित गीत व्रज वनिता के वासी प्यारे। मोहन नख पर पर्वत धारे।। सुरपति जमकर जल बरसाए। व्रजवासी जिससे घबराए।। कान्हा बनकर खेवन हारे। मोहन नख पर पर्वत…
दिवाली है आईं – मनु कुमारी
दिवाली है आई दीप जलाओ दीप जलाओ दिवाली है आई घर आंगन में चहुंओर अब,खुशियाली है छाई। मैं तो लूंगी फुलझड़ियां ,तू पटाखे ले लो भाई। नाचो गाओ खुशी मनाओ…
दीप रश्मियांँ- राम किशोर पाठक
दीप रश्मियाँ- गीत ज्ञान सत्य का हुआ नहीं तो, कहते हम अज्ञानी है। दीप रश्मियाँ जहाँ नहीं है, अँध की वहीं कहानी है।। एक अकेला किरण अगर हो, रहता तम…
दीपों की गरिमा अमरनाथ त्रिवेदी
दीपों की गरिमा दीप उम्मीद की किरण है , जो सपनों को जगाती । दिल मे प्रकाश भरकर , मन मे उजास लाती । कभी नफरत नही सिखाती , जहाँ तक प्रकाश जाए…
ऐसी होती दिवाली -रामपाल प्रसाद सिंह
कुकुभ छंद ऐसी होती दीवाली। मानस में दुर्भाव न होता,मुख पर बस होती लाली। आओ सोच-विचार करें हम, ऐसी होती दीवाली।। जितना हो सामर्थ्य हमारा,उतना भी कर पाते तो। पास…
दीपावली -एस.के पूनम
विधा:-मनहरण घनाक्षरी। दीपावली चहुँओर ज्योत जले, मिट जाए अंधकार, गणपति साथ बैठें ,आरती कर रहे। नगर शहर और , किया कस्बों ने श्रृंगार, प्रकाश से पुलकित,चाँद कुछ न कहे। झिलमिल…
प्रार्थना गीत रामकिशोर पाठक
प्रार्थना गीत भूल अगर हो जाए हमसे, माफ सदा कर देना। राम कृपा बस इतना करना, संबल का वर देना।। कष्टों में परिजन कुछ मेरे, तुझको सदा पुकारे। बिना तुम्हारे…
दिवाली की रात -जैनेंद्र प्रसाद रवि
दिवाली की रात में मनहरण घनाक्षरी छंद रोशनी का ये त्यौहार, खुशियांँ लाता अपार, घरों को सजाते लोग, दिवाली की रात में। लाते हैं वल्बों की लड़ी, छोड़ते हैं फुलझड़ी,…