भुला नहीं हूं -बैकुंठ बिहारी

भूला नहीं हूं बाल्यावस्था की शरारत भूला नहीं हूं, माता-पिता की आंखों में प्रसन्नता के अश्रु भूला नहीं हूं, किशोरावस्था का उतार-चढ़ाव भूला नहीं हूं, काम, क्रोध, मद लोभ, मोह…

गोवर्धन- राम किशोर पाठक

गोवर्धन- पादाकुलक छंद आधारित गीत व्रज वनिता के वासी प्यारे। मोहन नख पर पर्वत धारे।। सुरपति जमकर जल बरसाए। व्रजवासी जिससे घबराए।। कान्हा बनकर खेवन हारे। मोहन नख पर पर्वत…

दीप रश्मियांँ- राम किशोर पाठक

दीप रश्मियाँ- गीत ज्ञान सत्य का हुआ नहीं तो, कहते हम अज्ञानी है। दीप रश्मियाँ जहाँ नहीं है, अँध की वहीं कहानी है।। एक अकेला किरण अगर हो, रहता तम…

ऐसी होती दिवाली -रामपाल प्रसाद सिंह

कुकुभ छंद ऐसी होती दीवाली। मानस में दुर्भाव न होता,मुख पर बस होती लाली। आओ सोच-विचार करें हम, ऐसी होती दीवाली।। जितना हो सामर्थ्य हमारा,उतना भी कर पाते तो। पास…

दीपावली -एस.के पूनम

विधा:-मनहरण घनाक्षरी। दीपावली चहुँओर ज्योत जले, मिट जाए अंधकार, गणपति साथ बैठें ,आरती कर रहे। नगर शहर और , किया कस्बों ने श्रृंगार, प्रकाश से पुलकित,चाँद कुछ न कहे। झिलमिल…

प्रार्थना गीत रामकिशोर पाठक

प्रार्थना गीत भूल अगर हो जाए हमसे, माफ सदा कर देना। राम कृपा बस इतना करना, संबल का वर देना।। कष्टों में परिजन कुछ मेरे, तुझको सदा पुकारे। बिना तुम्हारे…

दिवाली की रात -जैनेंद्र प्रसाद रवि

दिवाली की रात में मनहरण घनाक्षरी छंद रोशनी का ये त्यौहार, खुशियांँ लाता अपार, घरों को सजाते लोग, दिवाली की रात में। लाते हैं वल्बों की लड़ी, छोड़ते हैं फुलझड़ी,…