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श्यामली सूरत
मनहरण घनाक्षरी छंद
गगन सा श्याम वर्ण-
सुध बुध खोया देख,
चैन को चुराती तेरी, श्यामली सूरत है।
मुरली तो अधरों से
करता है अठखेली,
दिल को लुभाती तेरी, मोहनी मूरत है।
घुंघराले काले बाल,
शुक जैसा ओठ लाल,
‘रवि’ जैसे प्रेमियों को, तेरी जरूरत है।
सिर पे मुकुट मोर,
गोपियों के चित्त चोर,
मनमोहक छवि-बड़ी खूबसूरत है।
जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

