गीदड़ तब शोर मचाएगा – रामपाल प्रसाद सिंह

गीदड़ तब शोर मचाएगा… निज शेर पाॅंव पीछे खींचे। निज ऑंखों को करके नीचे।। तब बुरा समझ कहलाएगा गीदड़ तब शोर मचाएगा मौसम छाया कई दिनों से। चल रहे हैं…

हे हरि क्लेश हरो -रामपाल प्रसाद सिंह

हे हरि! क्लेश हरो। विधा गीत। मेरे पीछे पड़ा जगत है,कर दो मालिक मदद जरा। सूख रहे जीवन उपवन को,हे हरि!कर दो हरा-भरा।। देना है तो दे दो मुझको,हमको तुम…

मतदान -रामकिशोर पाठक

मतदान – मनहरण घनाक्षरी दौड़ भाग कर रहे, खोज-खोज मिल रहे, पाँव भी पकड़ रहे, आया मतदान है। देखकर निहारते, हृदय से पुकारते, गले में बाह डालते, जैसे पहचान है।…

दोहा – राम किशोर पाठक

दोहा जैसे ही रचना हुई, दोहा-छंद प्रधान। वैसे ही मिलने लगा, लोगों से सम्मान।।०१।। दोहा-मात्रिक छंद है, सुंदर मनहर-गेय। मैं तो बौद्धिक मंद हूँ, साध रहा यह ध्येय।।०२।। चार-चरण में…