अब भी यूं रुका क्यों है -डॉ स्नेहलता द्विवेदी

तू अब भी यूँ रुका क्यूँ है? गुलाब कांटों से यूँ लगा क्यूँ है ? जिंदगी तेरा ये फ़लसफ़ा क्यूँ है? जो मुस्कराते हो शबनम की तरह, पलकों का रंग…

कर्मठ संस्कारी बच्चे -जैनेंद्र प्रसाद

कर्मठ संस्कारी बच्चे बाल सृजन रूप घनाक्षरी छंद में कर्मठ संस्कारी बच्चे, कहलाते हैं वे अच्छे, सबसे अलग निज, बनाते हैं पहचान। सुबह सवेरे जाग- व्यायाम करते जो, पौष्टिक आहार…

हिंदी दिवस रामपाल प्रसाद सिंह

हिंदी दिवस शिखर हिमालय से भी ऊॅंचा, हिंदी तुमको पाऊॅं मैं। तभी कहाऊॅं हिंदी भाषी, गुरुता जग समझाऊॅं मैं।। वेद पुराणों की परिभाषा, सरल बनाने तू आई। पूर्वज का इतिहास…

महाकाल -जैनेन्द्र प्रसाद

महाकाल की देवघर सोमनाथ, काशी व अमरनाथ, उज्जैन नगर बीच, बसे महाकाल हैं। भोलेनाथ उमापति, बनके जगतपति, शरणागत भक्तों का-वे रखते ख्याल हैं। शिव का भजन करें, चिंतन मनन करें,…

जीवित्पुत्रिका व्रत -रुचिका

जीवित्पुत्रिका व्रत सन्तान के सुख की कामना कर कर रही है माँ साधना चौबीस घण्टे का निर्जला उपवास कर कर रही है बस यही प्रार्थना। दुःख तकलीफ कभी जीवन में…