बेटियां -रुचिका

बेटियाँ पिता की पगड़ी को सम्भालती, खुद को हर साँचे में है ढालती, बेटियाँ रब की रहमत है, न जाने कितने घरों की सँवारती। बेटियाँ घर की रौनक हैं शान…

बेटी -प्रदीप छंद गीत – राम किशोर पाठक

बेटी- प्रदीप छंद गीत घर आँगन की शोभा बेटी, ईश्वर का वरदान है। जिस घर में रहती है बेटी, बढ़ता उसका मान है।। नहीं सही हम कमतर आंके, सहनशीलता मर्म…

उपवन नवरात्र का- सार छंद- रामकिशोर पाठक

उपवन नवरात्र का- सार छंद आज हमारा पुष्पित उपवन, देख चकित संसार। रंग बिरंगे फूलों से यह, शोभित है घर बार।। प्रथम दिवस से नवरात्र जहाँ, लगता माँ दरबार। बारी-बारी…

हे कात्यायनी मां -डॉ स्नेहलता

हे कात्यायनी ऋषि कात्यायन की हे सुता, यह दर्प तुम्हारा अद्भुत है। यह रूप तुम्हारा अद्भुत है, सौंदर्य तुम्हारा अद्भुत है। ज्योति द्युति प्रकृतिअद्भुत, अनुराग तुम्हारा अद्भुत है। महिषासुर मर्दनी…

मेरी बेटियां -डॉ स्नेहलता द्विवेदी आर्या

मेरी बेटियां मेरी बेटियां! मेरी प्रतिरूप, मैं बसती हूं उनमें, अंतस्त बिल्कुल अंदर, आद्यो पांत सर्वांग, प्राण वायु की तरह। मेरी बेटियां! मुस्कुराहटों में, आशाओं में, बातों में, आख्यानों में,…

माता जगतारिणी -रामपाल प्रसाद सिंह

हे माता! जगतारणी कुंडलिया छंद माता! तुम जगतारणी, जाना है भवपार। थाल लिए द्वारे खड़ा,कर ले तू स्वीकार।। कर ले तू स्वीकार,समय चाहे ले जितना। चरणों के ही पास,जगह दे…

जय स्कंदमाता स्नेहलता द्विवेदी

जय स्कंदमाता ममतामयी माँ ममतामयी तू है जगदम्बा, तू कार्तिकेय सुत जननी है। ताड़कासुर बध संकल्प लिये, माँ तू संतन हित करनी है। चार भुजायें धारण कर, पद्मासना तू महारानी…

ममतामई मां -जैनेंद्र प्रसाद रवि

प्रभाती पुष्प ममतामई मांँ कलाई में शोभता है- कंगन व बाजूबंद, मनमोहता है देवी, माता का सिंगार है। जिज्ञासु श्रद्धालु जन- करते हैं आराधना, जयकारा गूंज रहा, माता दरबार है।…

हे शुभंकरी -रामकिशोर पाठक

हे शुभंकरी सुधा त्रिधा त्वम् गायत्री। सती शिवा त्वम् सावित्री।। त्वयि नंदजा राधा त्वम् भक्तवत्सला आद्या त्वम् आदिशक्ति शक्ति दात्री। सती शिवा त्वम् सावित्री।। रसे रूपे च गंधे त्वम् कणांकणे…