Author: Dr Snehlata Dwivedi

उपवन नवरात्र का- सार छंद- रामकिशोर पाठकउपवन नवरात्र का- सार छंद- रामकिशोर पाठक

0 Comments 7:48 pm

उपवन नवरात्र का- सार छंद आज हमारा पुष्पित उपवन, देख चकित संसार। रंग बिरंगे फूलों से यह, शोभित है घर[...]

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हे कात्यायनी मां -डॉ स्नेहलताहे कात्यायनी मां -डॉ स्नेहलता

0 Comments 3:02 pm

हे कात्यायनी ऋषि कात्यायन की हे सुता, यह दर्प तुम्हारा अद्भुत है। यह रूप तुम्हारा अद्भुत है, सौंदर्य तुम्हारा अद्भुत[...]

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मेरी बेटियां -डॉ स्नेहलता द्विवेदी आर्यामेरी बेटियां -डॉ स्नेहलता द्विवेदी आर्या

0 Comments 2:51 pm

मेरी बेटियां मेरी बेटियां! मेरी प्रतिरूप, मैं बसती हूं उनमें, अंतस्त बिल्कुल अंदर, आद्यो पांत सर्वांग, प्राण वायु की तरह।[...]

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Ram Kishor Pathak

सजा दरबार मैया का- राम किशोर पाठकसजा दरबार मैया का- राम किशोर पाठक

0 Comments 8:49 pm

सजा दरबार मैया का – विधाता छंद गीत लगाती पार नैया जो, वही पतवार लाएँ हैं। सजा दरबार मैया का,[...]

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माता जगतारिणी -रामपाल प्रसाद सिंहमाता जगतारिणी -रामपाल प्रसाद सिंह

0 Comments 8:46 pm

हे माता! जगतारणी कुंडलिया छंद माता! तुम जगतारणी, जाना है भवपार। थाल लिए द्वारे खड़ा,कर ले तू स्वीकार।। कर ले[...]

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जय स्कंदमाता स्नेहलता द्विवेदीजय स्कंदमाता स्नेहलता द्विवेदी

0 Comments 7:23 pm

जय स्कंदमाता ममतामयी माँ ममतामयी तू है जगदम्बा, तू कार्तिकेय सुत जननी है। ताड़कासुर बध संकल्प लिये, माँ तू संतन[...]

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Jainendra

ममतामई मां -जैनेंद्र प्रसाद रविममतामई मां -जैनेंद्र प्रसाद रवि

0 Comments 1:30 pm

प्रभाती पुष्प ममतामई मांँ कलाई में शोभता है- कंगन व बाजूबंद, मनमोहता है देवी, माता का सिंगार है। जिज्ञासु श्रद्धालु[...]

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Ram Kishor Pathak

हे शुभंकरी -रामकिशोर पाठकहे शुभंकरी -रामकिशोर पाठक

0 Comments 1:23 pm

हे शुभंकरी सुधा त्रिधा त्वम् गायत्री। सती शिवा त्वम् सावित्री।। त्वयि नंदजा राधा त्वम् भक्तवत्सला आद्या त्वम् आदिशक्ति शक्ति दात्री।[...]

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जय स्कंदमाता -डॉ स्नेहलता द्विवेदीजय स्कंदमाता -डॉ स्नेहलता द्विवेदी

0 Comments 3:08 pm

जय स्कंदमाता ममतामयी माँ ममतामयी तू है जगदम्बा, तू कार्तिकेय सुत जननी है। ताड़कासुर बध संकल्प लिये, माँ तू संतन[...]

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माँ जब भजते- तीव्र अश्वगति छंद – राम किशोर पाठकमाँ जब भजते- तीव्र अश्वगति छंद – राम किशोर पाठक

0 Comments 8:09 pm

माँ जब भजते- तीव्र/अश्वगति छंद साधक याचक सा मन लेकर, धीरज धरते। माँ उनके घर आँगन आकर, कौतुक करते।। माँ[...]

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