धरणी छंद वर्णिक माँ शारदे, दया दिखलाओ। दे बुद्धि को, कृपा बरसाओ।। कोई कहे, तुम्हें बलशाली।मानें सदा, तुम्हें सब काली।।माता हमें, सही समझाओ।माँ शारदे, दया दिखलाओ।।०१।। कैसे कहूँ, नहीं कुछ…
Author: Swarakshi Swara
नववर्ष तुम्हारा स्वागत है..आशीष अंबर
कविता नववर्ष तुम्हारा स्वागत है,खुशियाँ मिले सबको बस यही चाहत है । नया जोश, नया उल्लास छाया है,खुशियाँ लेकर अपार नववर्ष आया है । तोड़कर नफरत भरी सब दीवारें अब,प्रेम…
जाड़े की धूप.. मो आसिफ़ इक़बाल
दुनिया के सारे इंसान बच्चे बूढ़े और जवान देखो कितनी ठंड पड़ी ठिठुर ठिठुर सब हैं परेशान।। अब तो एक ही आस है थोड़े जलावन जो पास है जला के…
राज को न खोलिए..रामकिशोर पाठक
राज को न खोलिए २१२-१२१-२ राज को न खोलिए।और से न बोलिए।। प्रीति नैन में बसी।आप खास हो लिए।। शब्द-शब्द खास है।जो मिठास घोलिए।। पत्र प्रेम में लिखा।प्रेम को न…
आपस में प्यार हो.. जैनेंद्र प्रसाद रवि
*आपस में प्यार हो*(मनहरण घनाक्षरी छंद)**********************कोई कहे लाख बुरा- करता बुराई नहीं, *अवगुण गुण बन-जाए सद्विचार हो*। यदि हो अभिन्न मित्र, दिल में बसा हो चित्र, *नहीं फर्क पड़ता है,…
सत्य अगर बोलूं..रामकिशोर पाठक
सत्य अगर बोलूँ- महा_शशिवदना छंद सत्य अगर बोलूँ, रूठ सभी जाते।झूठ कभी बोलूँ, संग चले आते।। मुश्किल होती है, सत की हर राहें।मान सहज लेते, उड़ती अफवाहें।।कौन बताएगा, काश समझ…
शब्दों के मोती..रामकिशोर पाठक
शब्दों के मोती- महा_शशिवदना छंद शब्दों के मोती, मैं चुनकर आऊँ।कैसे भी उनको, सुंदर कर जाऊँ।। उनसे है बनता, गीतों की माला।कानो में घुलती, बनकर मधुशाला।।गाकर जिसको मैं, नित चित…
मेरा जीवन..रामकिशोर पाठक
मेरा जीवन- गौरा सवैया २१२*६+२२२+११ जो हमें तू दिया नेह से हूँ लिया सर्व स्वीकार संजोया है मन।साथ देते रहा मैं सदा आज तो संग में है नहीं मेरा ही…
गणेश वंदना..राम किशोर पाठक
गणेश वंदना- सीता छंद देव तेरी वंदना जो, नित्य ही गाया करूँ। दिव्य तेरे रूप का मैं, दर्श जो पाया करूँ।। साधना कैसे करूँ मैं, विज्ञता दाता नहीं। याचना कैसे…
तू बचा ले .रामपाल प्रसाद सिंह
सीता छंद वर्णिक 15 वर्ण 2122-2122=2122-212तू बचा ले डूबने से।**************************लूटती लज्जा हमारी,नैन क्यों ना खोलते।खो गया है धैर्य मेरा,हो तराजू तोलते।।तू कहाॅंं मैं हूॅं कहाॅं जी,हो गई दूरी कहीं।ऑंख मेरी…