मानवता -बैकुंठ बिहारी

मानवता
दूसरों का सम्मान, करने का नाम है मानवता।
परिजनों का सत्कार, करने का नाम है मानवता।
याचक की याचना, सुनने का नाम है मानवता।
कष्ट से जूझते की, मदद करने का नाम है मानवता।
टूटते विश्वास को, जोड़ने का नाम है मानवता।
बहते आंसुओं को, पोंछने का नाम है मानवता।
विश्वास घात को विश्वास में,
बदलने का नाम है मानवता।
भयभीत को भय मुक्त,
करने का नाम है मानवता।
अपना कष्ट भूल कर,
दूसरों का कष्ट निवारण का नाम है मानवता।।
प्रस्तुति
बैकुंठ बिहारी
स्नातकोत्तर शिक्षक कम्प्यूटर विज्ञान उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सहोड़ा गद्दी कोशकीपुर

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