बिकें किताबें तौलकर-राम किशोर पाठक

Ram Kishore Pathak

बिकें किताबें तौलकर, कूड़े वाली भाव।

देख साहित्य की दशा, मन में होती घाव।।

पुस्तक हैं साहित्य के, लिए ज्ञान भंडार।

मोबाइल में भूलकर, खोया यह संसार।।

लिखते हम साहित्य है, लाना है बदलाव।

बिकें किताबें तौलकर, कूड़े वाली भाव।।०१।।

प्रज्ञा सबका कर हनन, बना दिया लाचार।

मोबाइल के सामने, चले नहीं अधिकार।।

मोबाइल के दौर में, कैसे रहें लगाव।

बिकें किताबें तौलकर, कूड़े वाली भाव।।०२।।

पुस्तक देता है सदा, ठोस ज्ञान आधार।

सही सीख सबमें भरे, सिखलाए आचार।।

फिर भी आशा रख लिखें, पुनः जगेगी चाव।

बिकें किताबें तौलकर, कूड़े वाली भाव।।०३।।

गीतकार:- राम किशोर पाठक

प्रधान शिक्षक

प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला

बिहटा, पटना, बिहार।

संपर्क – 9835232978

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