गर्मी की छुट्टी का आनंद हुई हर वर्ष गर्मी की छुट्टी, इस बार भी वही हुई । हम बच्चों के लिए खुशखबरी , दिल को इस बार अधिक छुई ।।…
Category: बाल कविता
उड़ान – रुचिका
उड़ान बच्चों तुम हो देश की जान, बनाओ अपनी विशेष पहचान, सीमाओं में मत बंधो तुम, हो तुम्हारी उन्मुक्त उड़ान। अक्षर-अक्षर से शब्द बनाओ, शब्द को वाक्य में सजाओ, हर…
खुद पढ़कर तू मुझे पढ़ाना – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
खुद पढ़कर तू मुझे पढ़ाना। काले तेरे केस निराले, जामुन जैसे काले-काले, फिर से नाम लिखालो दादू, नंबर एक मिलेगा खाना। खुद पढ़कर तू मुझे पढ़ाना।। पहले पहले साथ चलोगे,…
बच्चों की चाह – बिंदु अग्रवाल
बच्चों की चाह हम फूल हैं नन्हीं बगिया के, हमसे ही दुनिया महकेगी। विद्यालय जाएँगे जब हम, शिक्षा की ज्योति चमकेगी।। जो ठाना है हमने मन में , हम वह…
महासागर – बाल कविता – राम किशोर पाठक
महासागर आओ बच्चों तुम्हें बताएँ। बात पुरानी याद दिलाएँ।। सात समंदर कहती नानी। दूर देश की कथा सुहानी।। आओ जाने हम सच्चाई। नानी कहती यह क्यों भाई।। जल का विशाल…
निहारे जा रहा हूॅं मैं- रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
निहारे जा रहा हूॅं मैं। फिर से चित्र बनाने को, फिर से इत्र सुॅंघाने को, लेकर खुशी के ढोल-,नगारे जा रहा हूॅं मैं। निहारे जा रहा हूॅं मैं। पुन: आदि…
क्या मैं अबोध हूॅं – राम किशोर पाठक
क्या मैं अबोध हूॅं। माँ सुनो तो, एक बात जरा, क्या मैं अबोध हूॅं ? पाँच वर्ष की हो गयी, बहुत कुछ समझने भी लगी हूँ, तुम्हारे साथ अक्सर हाथ…
बचपन – रूचिका
बचपन बगीचे में नही जाता बचपन, बागों की दौड़ नही लगाता बचपन, मोबाईल की दुनिया में देखो कैसे अब गुम हो जाता बचपन। मोहल्ले की गलियाँ शांत पड़ी हैं, भरी…
बहुत गरम हुए सूरज दादा- अमरनाथ त्रिवेदी
बहुत गरम हुए सूरज दादा बहुत गरम हुए सूरज दादा, कोई उन्हें समझाए न। कैसे हमारे दिन कटेंगे, कोई उन्हें बतलाए न। सूरज दादा बड़े सवेरे, अपना रंग दिखाते हैं।…
हमहु स्कूल जैबय- कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’
हमहु स्कूल जैबय (अंगिका कविता) बस्ता लेके हमहु मैय्या स्कूल पढ़े जैबय। पढ़-लिखकर हमहु बड़ो आदमी बन जैबय।। बड़ो आदमी बनी के मैय्या खूब पैसा कमैबय। और तोरा लय मैय्या…