राष्ट्र भक्त हम, कहलाएँ- वासुदेव छंद गीत  राम किशोर पाठक 

राष्ट्र भक्त हम, कहलाएँ- वासुदेव छंद गीत  राष्ट्र हेतु हम, मिट जाएँ। राष्ट्र-भक्त हम, कहलाएँ।। आओ मिलकर, पले यहाँ। कदम मिलाकर, चले जहाँ।। गीत संग हम, यह गाएँ। राष्ट्र-भक्त हम,…

प्रकाश..राम किशोर पाठक

प्रकाश- अनंद छंद गीत (मात्रिक १२-१२-१२-१२, १२-१२-१२) सुमन यहाँ विछा रहें, पथिक चलो अभी।प्रदीप हम जला रहे, उदास क्यों सभी।। प्रयास लक्ष्य साधता, कदम बढ़ा जरा।सफल वही बना सदा, कभी…

तोटक छंद वर्णिक-रामपाल प्रसाद सिंहअनजान

तोटक छंद वर्णिक(112) 112-112-112-112 दो चरण सम तुकांत दिन में दिखते मन के सपने। हिय में रहने लगते अपने।। रचने लगते शुभ भाव यहाॅं। भरने लगते मन घाव यहाॅं।। सजने…

घर में आकर.. राम किशोर पाठक

घर में आकर- वासुदेव छंद गीत अपनों से जब, नैन मिले।घर में आकर, चैन मिले।। दौड़ लगाकर, थक जाते।दुनिया की सुन, झल्लाते।।आकर आँगन, रैन मिले।घर में आकर, चैन मिले।।०१।। धन…

दुविधा…राम किशोर पाठक

मनहरण घनाक्षरी दुविधा में हम पड़े,अपनी ही जिद अड़े,अधिकारी पास खड़े, होते परेशान हैं।साथी सारे कह रहे,लेन-देन कर कहे,चैन आप सब गहे, बने क्यों नादान हैं।रास मुझे आती नहीं,राज यह…

कुंडलिया.रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’

भाषा अच्छी बोलना,मुख का है शृंगार।संधारित जिसने किये,लूट लिए संसार।। लूट लिए संसार,स्वर्ग सुंदर मुस्काया।अवतारण की चाह,देव मानस पर छाया।। कहते हैं ‘अनजान’,सदा रखना अभिलाषा।करके ही अभ्यास, सुधारो अपनी भाषा।।…

आमोद हारी मुरारी- सर्वगामी/ अग्र सवैया छंद – राम किशोर पाठक

आमोद हारी मुरारी- सर्वगामी/ अग्र सवैया छंद – राम किशोर पाठक     आमोद हारी मुरारी सुनो भक्त का, भक्त तेरा तुझे ही पुकारा। राधा बिहारी धरूँ ध्यान तेरी सदा,…

धनतरेस रामकिशोर पाठक

धनतेरस – मनहरण घनाक्षरी धनतेरस है आया, लेकर धन की माया, बाजार धूम मचाया, हाट गुलजार है। करना है दीप-दान, यम को देते सम्मान, पूजन विधि विधान, सुंदर त्यौहार है।…

धनतरेस -रामपाल प्रसाद सिंह

धनतेरस। रोला छंद । पावन कार्तिक मास,स्वर्ग से सुंदर भाता। त्रयोदशी का योग,कृष्ण पक्ष अति सुहाता। प्रकट हुए धनदेव, ग्रंथ आदिम कहते हैं। देते शुभ सम्मान,सदा साधक रहते हैं।। धनतेरस…

मीठी बोली- रामपाल प्रसाद सिंह

मीठी बोली। कोयल के लिए स्वर,अनमोल सरोवर, डूबने को हर लोग,चाहते हैं दिन-रात। काक काला लिए रंग,कंठस्थ है स्वरभंग, करते बच्चों को तंग,निर्दयी पक्षी की जात। आचार-विचार से ही,पहचान मिलती…