मीठी बोली। कोयल के लिए स्वर,अनमोल सरोवर, डूबने को हर लोग,चाहते हैं दिन-रात। काक काला लिए रंग,कंठस्थ है स्वरभंग, करते[...]
Category: छंद
चरणों की भक्ति -जैनेन्द्र प्रसाद रविचरणों की भक्ति -जैनेन्द्र प्रसाद रवि
चरणों की भक्ति रूप घनाक्षरी छंद दानवों का दुनिया में अत्याचार बढ़ा जब, धरा की पुकार सुन, लिया तब अवतार।[...]
बालिका शिक्षा -रामकिशोर पाठकबालिका शिक्षा -रामकिशोर पाठक
बालिका शिक्षा सही गलत का निर्णय सारा, खुद उनके हीं हाथ हो।। सुखी सदा हो तभी बालिका, जब शिक्षा का[...]
दोहा – राम किशोर पाठकदोहा – राम किशोर पाठक
दोहा जैसे ही रचना हुई, दोहा-छंद प्रधान। वैसे ही मिलने लगा, लोगों से सम्मान।।०१।। दोहा-मात्रिक छंद है, सुंदर मनहर-गेय। मैं[...]
करवा चौथ रामपाल प्रसाद सिंहकरवा चौथ रामपाल प्रसाद सिंह
करवा चौथ गीतिका छंद दो हृदय सद्भावना के,मिल रहें विश्वास में। चंद्रमा आशीष भरने,आ रहा आकाश में।। चौथ करवा दिन[...]
शरद पुर्णिमा- राम किशोर पाठकशरद पुर्णिमा- राम किशोर पाठक
शरद पूर्णिमा- महामंगला छंद गीत स्वागत करती किरण, सोम देव मुस्कात। सुरभित शीतल शरद, मनभावन यह रात।। रजनी व्याकुल अजब,[...]
शरद ऋतु का दस्तक -जैनेंद्र प्रसाद रविशरद ऋतु का दस्तक -जैनेंद्र प्रसाद रवि
शरद् ऋतु का दस्तक अंधकार छंटते हीं, रवि की सवारी आया, बैठ तरु डाल पर, करते परिंदे शोर। पछियाँ जो[...]
शरद पूर्णिमा – गिरीन्द्र मोहन झाशरद पूर्णिमा – गिरीन्द्र मोहन झा
शरद पूर्णिमा की रात सुहावन, है अति मनभावन, चंद्रमा की चांदनी, उजाला, शीतलता, है अति पावन, चंद्रदेव अमृत-वृष्टि हैं कर[...]
जीवन सुंदर सरस – महामंगला छंद गीत, राम किशोर पाठकजीवन सुंदर सरस – महामंगला छंद गीत, राम किशोर पाठक
जीवन सुंदर सरस, लगता हरपल खास। कर्म करे जो सतत, होता नहीं उदास।। हारा मन कब सफल, मन के जीते[...]
शरद पूर्णिमा, रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’शरद पूर्णिमा, रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
विधाता छंदधारित मुक्तक शरद पूर्णिमा कहीं संगम कहीं तीरथ, धरा पर पुण्य बहते हैं, मगर जो आज देखेंगे, कहेंगे व्यर्थ[...]
