प्रकाश- अनंद छंद गीत (मात्रिक १२-१२-१२-१२, १२-१२-१२) सुमन यहाँ विछा रहें, पथिक चलो अभी।प्रदीप हम जला रहे, उदास क्यों सभी।।[...]
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तोटक छंद वर्णिक-रामपाल प्रसाद सिंहअनजानतोटक छंद वर्णिक-रामपाल प्रसाद सिंहअनजान
तोटक छंद वर्णिक(112) 112-112-112-112 दो चरण सम तुकांत दिन में दिखते मन के सपने। हिय में रहने लगते अपने।। रचने[...]
घर में आकर.. राम किशोर पाठकघर में आकर.. राम किशोर पाठक
घर में आकर- वासुदेव छंद गीत अपनों से जब, नैन मिले।घर में आकर, चैन मिले।। दौड़ लगाकर, थक जाते।दुनिया की[...]
दुविधा…राम किशोर पाठकदुविधा…राम किशोर पाठक
मनहरण घनाक्षरी दुविधा में हम पड़े,अपनी ही जिद अड़े,अधिकारी पास खड़े, होते परेशान हैं।साथी सारे कह रहे,लेन-देन कर कहे,चैन आप[...]
कुंडलिया.रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’कुंडलिया.रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
भाषा अच्छी बोलना,मुख का है शृंगार।संधारित जिसने किये,लूट लिए संसार।। लूट लिए संसार,स्वर्ग सुंदर मुस्काया।अवतारण की चाह,देव मानस पर छाया।।[...]
आमोद हारी मुरारी- सर्वगामी/ अग्र सवैया छंद – राम किशोर पाठकआमोद हारी मुरारी- सर्वगामी/ अग्र सवैया छंद – राम किशोर पाठक
आमोद हारी मुरारी- सर्वगामी/ अग्र सवैया छंद – राम किशोर पाठक आमोद हारी मुरारी सुनो भक्त का, भक्त[...]
धनतरेस रामकिशोर पाठकधनतरेस रामकिशोर पाठक
धनतेरस – मनहरण घनाक्षरी धनतेरस है आया, लेकर धन की माया, बाजार धूम मचाया, हाट गुलजार है। करना है दीप-दान,[...]
धनतरेस -रामपाल प्रसाद सिंहधनतरेस -रामपाल प्रसाद सिंह
धनतेरस। रोला छंद । पावन कार्तिक मास,स्वर्ग से सुंदर भाता। त्रयोदशी का योग,कृष्ण पक्ष अति सुहाता। प्रकट हुए धनदेव, ग्रंथ[...]
मीठी बोली- रामपाल प्रसाद सिंहमीठी बोली- रामपाल प्रसाद सिंह
मीठी बोली। कोयल के लिए स्वर,अनमोल सरोवर, डूबने को हर लोग,चाहते हैं दिन-रात। काक काला लिए रंग,कंठस्थ है स्वरभंग, करते[...]
चरणों की भक्ति -जैनेन्द्र प्रसाद रविचरणों की भक्ति -जैनेन्द्र प्रसाद रवि
चरणों की भक्ति रूप घनाक्षरी छंद दानवों का दुनिया में अत्याचार बढ़ा जब, धरा की पुकार सुन, लिया तब अवतार।[...]
