हमहु स्कूल जैबय (अंगिका कविता) बस्ता लेके हमहु मैय्या स्कूल पढ़े जैबय। पढ़-लिखकर हमहु बड़ो आदमी बन जैबय।। बड़ो आदमी[...]
Category: बाल कविता
दिल तो बच्चा है जी – बाल गीत – रत्ना प्रियादिल तो बच्चा है जी – बाल गीत – रत्ना प्रिया
बाल गीत (दिल तो बच्चा है जी) ……………………… बचपन की अठखेली, प्यारी-प्यारी बोली, पल में रूठें, मानें, हर गम से[...]
सीख- विजात छंद मुक्तक – राम किशोर पाठकसीख- विजात छंद मुक्तक – राम किशोर पाठक
सीख- विजात छंद मुक्तक सदा वाणी सहज बोलें। नहीं विद्वेष को घोलें।। अगर कोई सताए तो। नहीं चुपचाप से रो[...]
बचपन – स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’बचपन – स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’
बचपन सुन्दर! मनमोहक, समय, रुका नहीं क्यों? शायद! रुकता नहीं वक्त, भुला नहीं क्यों? खेल! मैदान, दौड़, रूठना , मनाना,[...]
आम फलों का राजा है – अमरनाथ त्रिवेदीआम फलों का राजा है – अमरनाथ त्रिवेदी
आम फलों का राजा है बड़े बड़े और पीले पीले , होते आम बड़े रसीले । सभी फलों का राजा[...]
बचपन में जो नहीं पिटाया- रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’बचपन में जो नहीं पिटाया- रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
बचपन में जो नहीं पिटाया बचपन में जो नहीं पिटाया, उसका है इतिहास नहीं। निज घर में पिंजरबद्ध हुआ,उसका है[...]
माँ की सीख- स्रग्विणी छंद – राम किशोर पाठकमाँ की सीख- स्रग्विणी छंद – राम किशोर पाठक
स्रग्विणी छंद आधारित माँ की सीख- बाल सुलभ रोज माँ टोकती है सुधारो इसे। दोष तूने किया है निहारो इसे।।[...]
हम नन्हें-मुन्हें बालक हैं – अमरनाथ त्रिवेदीहम नन्हें-मुन्हें बालक हैं – अमरनाथ त्रिवेदी
हम नन्हें-मुन्हें बालक हैं हम नन्हें-मुन्हें है बालक, दिल के बहुत हीं भोले। कोई पूछता जब हमसे, हैं बन जाते बड़बोले।। जागने[...]
क्रिकेट में वह छाया सोना – रामपाल प्रसाद सिंह अनजानक्रिकेट में वह छाया सोना – रामपाल प्रसाद सिंह अनजान
क्रिकेट में वह छाया सोना। खेल खेलना अच्छा लगता। खेल नहीं तो जीवन खलता।। जीवन को हिस्सों में बाॅंटो। बचपन[...]
लोरी: ममता की मीठी छाया – सुरेश कुमार गौरवलोरी: ममता की मीठी छाया – सुरेश कुमार गौरव
लोरी: ममता की मीठी छाया चंदा मामा पास बुलाते, तारे झिलमिल झूला झुलाते, माँ की गोदी, प्यार की बूँदें, सपनों[...]
