कौन? रत्ना प्रिया

नित्य कर्म करती है प्रकृति पर,रहती है शाश्वत मौन,कई प्रश्न उठते हैं मन में,इसका उत्तर देगा कौन ? नित्य समय पर दिनकर आता,प्रकाश का अक्षय भंडार,इस जगती के हर प्राणी…

हिंदी – गिरिधर कुमार

हिंदी   हिन्द की आवाज, प्राकृत, पाली, संस्कृत से क्रमशः निःसृत, भारतीयता की पहचान हिंदी।   भारतेंदु से पंत तक, महादेवी से भावपूरित, निराला के अंनत तक, दिनकर की ओज…

हिंदी: सुर वाणी की जाया- राम किशोर पाठक

हिंदी, सुर वाणी की जाया- किशोर छंद सुर वाणी की जाया कहिए, हिंदी को। भूल रहे सब क्यों है गहिए, हिंदी को।। हृदय भाव में फिर से भरिए, हिंदी को।…

दादा-दादी -राहुल कुमार रंजन

दादा-दादी हैं सबसे न्यारे,घर-आंगन के चमकते तारे। उनसे मिलता स्नेह अनोखा,हर किस्सा होता है रोचक-रोखा। दादी सुनाए कहानी प्यारी,नींद लगे मीठी-मीठी सारी। दादा सिखाते ज्ञान की बातें,जीवन भर जो काम…

राहगीर -रुचिका

राहगीर राह की मुसीबतों से न घबड़ा, तू है राहगीर जरा रुक,सम्भल, राह की मुसीबतों का सामना कर और आगे बढ़ता जा। बाधाएँ तेरे राह में अनेकों आएंगी मंजिल से…

शिक्षक तेरी सत्य कहानी – डॉ कार्तिक कुमार

शिक्षक तेरी सत्य कहानी   शिक्षक तेरी सत्य कहानी, हाथ में लेखनी आंख में पानी। जीवन  बिता विज्ञानी वाणी, सुनो अपनी सरल कहानी। पुरानी पेंशन हाथ ना आनी, बुढ़ापे मैं…