पद्धरी छंदसम -मात्रिक छंद, 16 मात्राएँआरंभ द्विकल से,पदांत Slअनिवार्य रघुनंदन का है शिकार। हर दिशा निशा लो गईं जाग।सबके होंठों पर एक राग।।रावण का करना आज दाह।घर जाते करना वाह-वाह।।…
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आलू रे आलू तेरा रंग कैसा – नीतू रानी
आलू रे आलू तेरा रंग कैसाजिस सब्जी में मिला दूँ लगे उस जैसाआलू रे आलू ———-२। आलू की चटनी बहुत हीं प्यारीआलू की भूजिया बड़ी निराली,ये दोनों भात, दाल पे…
भारत की बेटियां – आशीष अंबर
सारे संसार में नाम कमाया है ,अपनी प्रतिभा का जादू बिखराया है।देश हो या विदेश हर जगह ,भारत की बेटियां अपना लोहा मनवाया है। कल्पना चावला, नीरजा या हो पीटी…
सामाजिक समानता – जैनेन्द्र प्रसाद रवि
मनहरण घनाक्षरी छंद सैकड़ो हैं धर्म-पंथ,जिसका नहीं है अंत,दुनिया में गरीबों की, होती नहीं जात है। दिन भर कमाते हैं,जो भी मिले खा लेते हैं,जहांँ होती शाम वहीं, कट जाती…
बालमन में मेले का उत्साह – अवधेश कुमार
मेले में छा जाती है,रंग-बिरंगी रोशनी की चमक,गुब्बारे, झूले, मिठाई की महक,आँखों में जाग उठती है नई-नई चमक।बर्गर , मोमोज और आइसक्रीम पर फिसलता जीभ का स्वाद ,पारंपरिक झिलिया मुरही…
सफल होना – राम किशोर पाठक
बासंती छंद वार्णिक आओ मेरे पास, सफल जो चाहो होना।भूलो सारी बात, अगर चाहोगे सोना।।हारे वैसे लोग, सतत आगे जो भागे।जीते हैं वें लोग, अगर पीछे भी जागे।। पाना हो…
नाइट शिफ्ट की संवेदना – अवधेश कुमार
कभी आओ जो फुर्सत में,तो कुछ बातें कर लें,जो ठहर गई है ज़िंदगी,उसका भी हिसाब कर लें। शाम से सुबह तक जागती हैं ये आँखें,इंतज़ार की सलवटों में डूबी,कितने सवालों…
काशक फूल – अवधेश कुमार
काशक फुलधरती पर जब सरदक पइैन झरिक गेल,हवा हलर-हलर बहि रहल,ओकर संग गामक गाछ-बिरिछ झूमि-झूमि उठल,तखन हरियर खेतक बीच सँसफेद आ नीलल उजासक झलक द’ रहल अछि –काशक फुल। काश,जकर…
एक बाल मन की कमेंट्री – अवधेश कुमार
ग्राउंड में जब आई धूम,एशिया कप का था फाइनल बूम बूम।पाकिस्तान आया बड़े जिगरी मिजाज में,सोचा, जीतेंगे हम, छक्के-छक्के बाज़ार में। पर बल्ला शुरुआत में बोला साहिबजादा फरहान और फखर…
महाष्टमी में खोइछा का महत्व – अवधेश कुमार
खोइछा में संजोया शुभ आशीष,माँ के चरणों का अनमोल वचन। धान, दूब, हल्दी, सुपारी के संग,बन जाती जीवन में खुशियों का अंग ।मिथिला के घर-आंगन में बंसा ,स्त्री शक्ति का…