ऋण ऋण माता का, ऋण पिता का, ऋण भाई बहन का, ऋण प्रियजनों का।। ऋण मित्र का, ऋण शत्रु का,[...]
Category: Bhawna
पानी – गिरींद्र मोहन झापानी – गिरींद्र मोहन झा
पानी तू रंगहीन होती, फिर भी तेरे रंग अनेक,श्रेष्ठ विलायक बनकर तू कितनों को करती एक,आंखों का पानी, हो सबके[...]
मेरी पोषण वाली थाली – अवधेश कुमारमेरी पोषण वाली थाली – अवधेश कुमार
मेरी पोषण वाली थाली : बाल कवितामाँ ने सजाये थाली में अनोखे रंग ,पोषण थाली अब करेगी कुपोषण से जंग[...]
कैसे कह दूं – बैकुंठ बिहारीकैसे कह दूं – बैकुंठ बिहारी
कैसे कह दूंकैसे कह दूं कि सब ठीक है,अजीब सी बेचैनी है।कैसे कह दूं कि सब ठीक है,अजीब सा अधूरापन[...]
रामायण – राम किशोर पाठक रामायण – राम किशोर पाठक
आओ चिंतन कर लें थोड़ा, जो खुद गढ़ते हैं। गाथा सुंदर रामायण की, हम-सब पढ़ते हैं।। नारायण होकर जब नर[...]
दीपावली का त्योहार – आशीष अम्बरदीपावली का त्योहार – आशीष अम्बर
दीपावली का त्योहार आया, संग में अपने खुशियाँ लाया । रंगोली से घर को सजायेंगे, मिलकर खुशियाँ खूब मनायेंगे ।[...]
अक्टूबर – रुचिकाअक्टूबर – रुचिका
देखो,कैसे आ गया अक्टूबर थोड़ी सी ठंडी हवा लेकर, थोड़ी सी सूरज की गर्मी चुराकर थोड़ी सी सूरज में नर्मी[...]
नारी का अपमान -जैनेंद्र प्रसादनारी का अपमान -जैनेंद्र प्रसाद
नारी का अपमान मनहरण घनाक्षरी छंद लंकापति रावण का यश बल धन गया, किया अपमान जब, जनक दुलारी का। कौरवों[...]
प्यारे चांद -डॉ स्नेहलता द्विवेदीप्यारे चांद -डॉ स्नेहलता द्विवेदी
प्यारे-चाँद ओ चाँद उतर मेरे अँगना, मैं तो बैठी संग है बहना। जा ढूंढ के ला मेरा सजना, न उतरे[...]
