Category: padyapankaj

Through Padyapankaj, Teachers Of Bihar give you the chance to read and understand the poems and padya of Hindi literature. In addition, you can appreciate different tastes of poetry, including veer, Prem, Raudra, Karuna, etc.

Suresh kumar

श्रमिक की व्यथा-कथा- सुरेश कुमार गौरवश्रमिक की व्यथा-कथा- सुरेश कुमार गौरव

0 Comments 1:44 pm

मैं भी शान से जीना चाहता हूं मेहनत की रोटी कमाता हूं, दृढ़ शौक है मेरे भी कुछ, बच्चों को[...]

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Jainendra

मौसम का रंग- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’मौसम का रंग- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 10:48 am

(रूप घनाक्षरी छंद) ठंडी-ठंडी हवा चली, सूखी मिट्टी हुई गीली, धूल भरी आंधी लाया, बादल ने बूंदों संग। हाँफ रहे[...]

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Ashmaja Priyadarshini

बाल मजदूर- अश्मजा प्रियदर्शिनीबाल मजदूर- अश्मजा प्रियदर्शिनी

0 Comments 10:47 am

अपने बचपन को खोता कितना वह लाचार। मलिन सी काया,दुर्बल छवि,जीर्ण- शीर्ण आकार। अत्यंत आवश्यक प्यासे को पानी भूखे को[...]

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पुस्तक- मीरा सिंह “मीरापुस्तक- मीरा सिंह “मीरा

0 Comments 9:20 am

पुस्तक होती ज्ञान दायिनी सबको राह दिखाती है। मानव का सच्चा साथी बन हर पग साथ निभाती है।। अम्मा बन[...]

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Manu

कुंडलियां छन्द – मनु कुमारीकुंडलियां छन्द – मनु कुमारी

0 Comments 8:49 am

कुंडलियां छन्द-मैथिली ( बैसाखी पर्व पर ) बैसाखी पाबैन में,दुलहिन रहूं जुड़ाय। अचल रहय अहिबात आ, सुन्दर बनय सुभाय।। सुन्दर[...]

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Ashmaja Priyadarshini

परीक्षा- अश्मजा प्रियदर्शिनीपरीक्षा- अश्मजा प्रियदर्शिनी

0 Comments 7:52 am

समय का रजत रथ नित नवीन रश्मियों से युक्त बढता जाता। जब आता परीक्षा का समय तब छूट जाता हमारा[...]

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वीर सपूत अंबेडकर- रत्ना प्रियावीर सपूत अंबेडकर- रत्ना प्रिया

0 Comments 7:44 am

संविधान की धाराओं में , प्रेरणा नवनिर्माण है , अंबेडकर जैसा वीर सपूत , भारत का अभिमान है | जाति-प्रथा,[...]

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Jainendra

बैशाखी- जैनेन्द्र प्रसाद रविबैशाखी- जैनेन्द्र प्रसाद रवि

0 Comments 7:41 am

बरसों बाद फिर आई रुत ये बहार के, शुभ घड़ी आई, दिन बीते इंतजार के। फसलें तैयार हुईं देखो मन[...]

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Jainendra

प्यारे बच्चे- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’प्यारे बच्चे- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 1:54 pm

मनहरण घनाक्षरी छंद जगत से न्यारा रूप, ढ़ल जाते अनुरूप, बनकर चितचोर, सबको लुभाता है। पल में ही रूठ जाता,[...]

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