चाहता हूँ मैं रोज मुझे माँ ,लोरी गा के सुनाए | माँ की लोरी , माँ का आंचल , माँ[...]
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Through Padyapankaj, Teachers Of Bihar give you the chance to read and understand the poems and padya of Hindi literature. In addition, you can appreciate different tastes of poetry, including veer, Prem, Raudra, Karuna, etc.
मनहरण घनाक्षरी- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’मनहरण घनाक्षरी- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
वृक्ष पुत्र के समान, रखें सभी नित्य ध्यान, शुद्ध वायु प्राप्त होती, बड़े-बड़े काम हैं। पत्ते हैं गुणकारक, छाया तो[...]
मुकुट मोर का है – एस.के.पूनममुकुट मोर का है – एस.के.पूनम
🙏कृष्णाय नमः🙏 विद्या:-मनहरण घनाक्षरी निशाकर सोच रहे, यामिनी से वह कहे, कर ले अँखियाँ बंद,दस्तक है भोर का। मयूख है[...]
सीतासोहर- मनु रमण “चेतना”सीतासोहर- मनु रमण “चेतना”
सुन्दर सुभग मिथिला धाम से, पावन पवित्र भूमि रे। ललना रे जहां बसु राज विदेह, प्रजा प्रतिपालक रे। चकमक मिथिलाक[...]
हाय हाय ये सरकार – निधि चौधरीहाय हाय ये सरकार – निधि चौधरी
जातिगत गणना के….. .. सुन ल बयार हे.. ….. घर घर गइनी, आदमी गिननी, बीबी गिननी, बुतरू गिननी, गिननी मोटर[...]
मनहरण घनाक्षरी – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’मनहरण घनाक्षरी – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
शाक्य वंश जन्म लिए, सत्य धर्म भाव किए, तथागत बुद्ध हुए, कृतियाँ महान हैं। राजपाट त्याग कर, मूल कर्म झोली[...]
मेहनत भेल हमर बेकार- नीतू रानीमेहनत भेल हमर बेकार- नीतू रानी
मेहनत भेल हमर बेकार, ठंडी,गर्मी में खटबेलक बिहार सरकार मेहनत भेल——–2। ठंडी में केलौं हम जाति गणना भेलौं हम बीमार,[...]
सगुण छंद – सुधीर कुमारसगुण छंद – सुधीर कुमार
मात्रा – 19 122 122 122 121 बहाओ सदा प्रेम भरकर समीर । मिटाओ अँधेरा गये कह कबीर ।। जलो[...]
बारिश- जैनेन्द्र प्रसाद रविबारिश- जैनेन्द्र प्रसाद रवि
छाई घटा घनघोर, जंगल में नाचे मोर, श्याम धन संग-संग, झूमे आसमान ये। बागों में बहार आई, तितली भी इठलाई,[...]
कवित्त छंंद- एस.के.पूनमकवित्त छंंद- एस.के.पूनम
घनघोर घटा छाई, बारिश की बूंदें लाई, धरा ताप भूल गई, देखे आसमान ये। घुमड़-घुमड़ कर, गगन में नाच कर,[...]
