गुरू को समर्पित बागानों में फल-फूल, खेतों बीच कंद-मूल, सुमन को बसंत में, ‘रवि’ महकाता कौन! सूरज कहां से आता[...]
Category: padyapankaj
Through Padyapankaj, Teachers Of Bihar give you the chance to read and understand the poems and padya of Hindi literature. In addition, you can appreciate different tastes of poetry, including veer, Prem, Raudra, Karuna, etc.
नारी- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’नारी- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
समाज की बलि नित्य बनती है औरत, क्या समाप्त हो गई हमें इसकी जरूरत? श्रद्धा से प्रेरणा पा मनु को[...]
पावन होली आई है- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’पावन होली आई है- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
विधा: गीत(१६-१४) आओ स्नेहिल रंग उड़ाओ, पावन होली आई है। बच्चे बूढ़े नर- नारी पर, कैसी मस्ती छाई है।। सुंदर[...]
होली तेरे संग चले -मनोज कुमारहोली तेरे संग चले -मनोज कुमार
होली तेरे संग चले हर एक कली जब बोल उठे, मादक मंजर रस टपके, कोयल कूके तन तरसे, बाग की[...]
चंचल वन में मनी है होली-निधि चौधरीचंचल वन में मनी है होली-निधि चौधरी
एक बाल कविता होली आई होली आई, चंचल वन की टोली आई। शेर, जिराफ,लोमड़ी, सियार, सभी को भाया है त्योहार।[...]
गुरु को नमन-जैनेन्द्र प्रसाद रवि’गुरु को नमन-जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
पूरब में देख लाली, झूमती है डाली डाली, धरती आबाद होती, सूरज किरण से। बसंत बहार देख, फूलों की कतार[...]
रास छंद- सुधीर कुमाररास छंद- सुधीर कुमार
प्यारे बच्चों , तुम सब मिलकर , अब रहना । इस जीवन में , उत्तम विद्या , ही पढ़ना ।।[...]
शिष्टाचार -जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’शिष्टाचार -जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
मनहरण घनाक्षरी छंद सामाजिक रिवाजों से, कट रहे युवा पीढ़ी, शिष्टाचार – व्यवहार, दिखते न वाणी में। सत्य का महल[...]
बगिया की उदासी- संजय कुमारबगिया की उदासी- संजय कुमार
आज बगिया क्यों उदास है, बोलो मेरे पापाजी। कल तक कितनी चहल पहल थी गुलजार तुम्हारी बगिया थी। माँ खुश[...]
क्यूँ हम भूल जाते हैं-भोला प्रसाद शर्माक्यूँ हम भूल जाते हैं-भोला प्रसाद शर्मा
जब हम माँ के गर्भ में होते हैं मुझे बहुत सुखों की अनुभूति होती है कुछ ही दिनों में हमें[...]
