Category: padyapankaj

Through Padyapankaj, Teachers Of Bihar give you the chance to read and understand the poems and padya of Hindi literature. In addition, you can appreciate different tastes of poetry, including veer, Prem, Raudra, Karuna, etc.

suresh kumar gaurav

मृगतृष्णा- सुरेश कुमार गौरवमृगतृष्णा- सुरेश कुमार गौरव

0 Comments 7:49 pm

जल की लहरों की भांति मिथ्या प्रतीति है यह धरा के उपर भी कड़ी धूप सी लगती है यह। गर्मी[...]

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Sanjay Kumar

युवापराक्रम- संजय कुमारयुवापराक्रम- संजय कुमार

0 Comments 7:15 pm

उठो,जागो और आगे बढ़ो विवेकानंद जी का ये नारा, शून्य की सर्वश्रेष्ठ व्याख्या कर बनें विश्व की आँखों का तारा।[...]

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Devkant

मनहरण घनाक्षरी- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’मनहरण घनाक्षरी- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 6:51 pm

विधा: मनहरण घनाक्षरी राष्ट्र के हैं दिव्य लाल, सौम्य तन उच्च भाल, ज्ञान बुद्धि प्रेम के वे, निर्मल स्वरूप हैं।[...]

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Jaykrishna

मैं सलाम करता हूं- जयकृष्णा पासवानमैं सलाम करता हूं- जयकृष्णा पासवान

0 Comments 6:49 pm

घर के दहलीज से , बाहर निकल कर । माथे पे जुनून का , पगड़ी पहनकर ।। समाज के ताने[...]

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Jainendra

श्रीराम राज्याभिषेक- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’श्रीराम राज्याभिषेक- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 6:48 pm

मनहरण घनाक्षरी छंद सफल हों सारे काज, राम होंगे युवराज, राजदरबार संग, हर्षित समाज है। बड़े-बड़े भूप आए, भेंट उपहार[...]

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Jainendra

हालात से मजबूर- जैनेन्द्र प्रसाद रविहालात से मजबूर- जैनेन्द्र प्रसाद रवि

0 Comments 8:50 pm

जीवन के कई रंग, लोग यहां लड़ें जंग, ठंड से ठिठुरे, नहीं चादर है पास में। कोई नहीं देखे अभी,[...]

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S K punam

शीत का भरण है- एस.के.पूनमशीत का भरण है- एस.के.पूनम

1 Comment 8:48 pm

विद्या:-मनहरण घनाक्षरी ठंडी-ठंडी हवा चली, शीत यहाँ खूब पली, आलाव है जल पड़ी,ठंड में शरण है। अंशु-अंशु कह पड़ा, करबद्ध[...]

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Ranjeet Kushwaha

प्रकृति और मनुष्य- रणजीत कुशवाहाप्रकृति और मनुष्य- रणजीत कुशवाहा

0 Comments 9:40 pm

प्रकृति है जीवन का आधार। मनुष्य ने किया इससे खिलवाड़।। गगनचुंबी इमारत की जाल बिछाई। धरा पर कंक्रीट रुपी जंगल[...]

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