मनहरण घनाक्षरी छंद जब कभी युद्ध होता, शांति को मानव खोता, द्वंद में विनाश छिपा, संतों का है कहना। प्रेम[...]
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Through Padyapankaj, Teachers Of Bihar give you the chance to read and understand the poems and padya of Hindi literature. In addition, you can appreciate different tastes of poetry, including veer, Prem, Raudra, Karuna, etc.
सर्दी का प्रहर-मनु कुमारीसर्दी का प्रहर-मनु कुमारी
रे! सर्दी का प्रहर, अब और ना ठहर! क्यों गरीबों के सिर पर तू, ढा रहा है कहर। रे सर्दी[...]
सुहाना मौसम- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’सुहाना मौसम- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
मनहरण घनाक्षरी छंद सरसों के फूलों पर, तितली है मँडराती, बहारों के आने पर, हँसता चमन है। झूमती खुशी में[...]
कर्त्तव्य के आलोक पथ पर – अमरनाथ त्रिवेदीकर्त्तव्य के आलोक पथ पर – अमरनाथ त्रिवेदी
कर्त्तव्य के आलोक पथ पर , कुछ दीया मैं भी जला दूँ । सज दूँ इसे अवली बनाकर , प्रेमपथ[...]
प्रचंड ठंढ- ब्यूटी कुमारीप्रचंड ठंढ- ब्यूटी कुमारी
ठंढ़ है प्रचंड डस रहा बन भुजंग। बह रही सर्द हवा कांप रही है धरा। छाया घना कोहरा बह रही[...]
पिता एक संपूर्ण विकास प्रदाता- सुरेश कुमार गौरवपिता एक संपूर्ण विकास प्रदाता- सुरेश कुमार गौरव
पिता एक अस्तित्व हैं जिसके रहने से स्थायित्व का बोध होता है घने वृक्ष की छाया में शांति का अनुभव[...]
अंगिका गीत- जयकृष्णा पासवानअंगिका गीत- जयकृष्णा पासवान
दही चूड़ा चीनी आलूदम हो, हमरा नामन लगैय छै। नामन लगैय छै हमरा…२।। देखैल चलो मसूदन के द्वार- हो… हमरा[...]
मौसम का असर- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’मौसम का असर- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
मनहरण घनाक्षरी छंद दही-चूड़ा,तिल खा के, सूरज है अलशाया, कुहासे में दिखता है, धुंधला गगन है। पेड़ों की डालियों से[...]
चुप्पी कलम की- गौतम भारतीचुप्पी कलम की- गौतम भारती
कलम! तू क्यों चुप है ? कुछ तो बोल । इंसानों की इंसानियत पर बोल , काबिलों की काबिलियत पर[...]
मृगतृष्णा- सुरेश कुमार गौरवमृगतृष्णा- सुरेश कुमार गौरव
जल की लहरों की भांति मिथ्या प्रतीति है यह धरा के उपर भी कड़ी धूप सी लगती है यह। गर्मी[...]
